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Kannauj Sanitation Workers Protest -कन्नौज में सामुदायिक शौचालय की केयर टेकरों का प्रदर्शन, बकाया वेतन की मांग

कन्नौज से एक बड़ी और गंभीर खबर सामने आई है, जहां सामुदायिक शौचालयों में कार्यरत महिला केयर टेकरों ने अपने बकाया वेतन की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। कई वर्षों से वेतन न मिलने से नाराज़ महिलाओं ने जनसमर्थ कल्याणकारी एसोसिएशन के बैनर तले कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिला प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया और जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगाई।

यह मामला कन्नौज जनपद का है, जहां सामुदायिक शौचालयों में तैनात महिला केयर टेकर लंबे समय से वेतन न मिलने से आर्थिक संकट का सामना कर रही हैं। शुक्रवार को बड़ी संख्या में महिलाएं एकजुट होकर कलेक्ट्रेट पहुंचीं और हाथों में तख्तियां लेकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। महिलाओं का कहना है कि वे दिन-रात मेहनत कर स्वच्छता व्यवस्था को बनाए रखती हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें समय पर वेतन नहीं दिया जा रहा।

प्रदर्शन कर रहीं महिलाओं ने बताया कि कई बार संबंधित अधिकारियों और विभागों से शिकायत की गई, लेकिन उनकी समस्याओं को अनसुना कर दिया गया। हालत यह है कि कुछ महिला कर्मियों को पिछले चार वर्षों से वेतन नहीं मिला है, जिससे उनके सामने परिवार चलाने और बच्चों की पढ़ाई तक का संकट खड़ा हो गया है।

जनसमर्थ कल्याणकारी एसोसिएशन के बैनर तले किए गए इस प्रदर्शन में एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष भी मौजूद रहे। उन्होंने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार स्वच्छ भारत मिशन के तहत सामुदायिक शौचालयों के संचालन की बात तो करती है, लेकिन वहां कार्यरत महिलाओं के अधिकारों की पूरी तरह अनदेखी की जा रही है।

 विनोद कुमार, प्रदेश अध्यक्ष, जनसमर्थ कल्याणकारी एसोसिएशन
“सामुदायिक शौचालयों में काम करने वाली कई महिला कर्मियों को पिछले चार साल से वेतन नहीं मिला है। वे लगातार काम कर रही हैं, लेकिन प्रशासन उनकी सुध नहीं ले रहा। अगर जल्द वेतन नहीं दिया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।”

प्रदर्शन कर रहीं महिलाओं ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए बकाया वेतन का तत्काल भुगतान कराए जाने की मांग की। महिलाओं का कहना है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन को और व्यापक रूप देंगी।

इस पूरे मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्वच्छता व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली महिला केयर टेकर आज अपने हक के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में कितनी जल्दी संज्ञान लेकर पीड़ित महिलाओं को राहत दिलाता है।

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