कन्नौज के छिबरामऊ तहसील के बूचपुर (मौजा पलिया बूचपुर) गांव में एक गंभीर समस्या सामने आई है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पिछले 45 वर्षों से चकबंदी के बाद से ही चकमार्ग के रूप में उपयोग में आ रहा ग्राम समाज की भूमि पर दबंग लोगों ने अवैध कब्जा कर दिया है। इस रास्ते के बंद होने से ग्रामीणों और किसानों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। अब ग्रामीणों ने एसडीएम से इस अवैध कब्जे को हटवाने और चकमार्ग बहाल कराने की मांग की है।
बूचपुर गांव की गाटा संख्या 682, लगभग 40 डेसिमल क्षेत्रफल वाली यह भूमि सार्वजनिक आवादी क्षेत्र है और पिछले 45 वर्षों से चकमार्ग के रूप में उपयोग हो रहा है। यह मार्ग गांव के लोगों के लिए पैदल आवागमन का मार्ग होने के साथ-साथ किसानों के लिए फसलें ट्रैक्टर से घर और बाजार तक पहुंचाने का मुख्य रास्ता भी है।
ग्रामीणों का आरोप है कि चकबंदी अभिलेखों के आग से नष्ट होने का फायदा उठाकर कुछ दबंग लोगों ने इस चकमार्ग पर दीवार खड़ी कर दी और रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया। उन्होंने चार-पांच पौधे भी लगा दिए और पूरे गाटा पर कब्जा कर लिया। इस भूमि पर ग्रामीणों के होलिका दहन का स्थान भी था, जो अब भी कब्जाधारियों के कारण बंद है।
ग्रामीणों ने बताया कि अब किसानों को फसलें खेत से निकालकर घर-बाजार तक पहुंचाने में भारी कठिनाई हो रही है। रास्ता बंद होने के कारण उन्हें लंबा चक्कर काटना पड़ रहा है, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ रहे हैं। खासकर फसल कटाई के समय यह समस्या और गंभीर हो जाती है।
कई ग्रामीणों ने कहा कि यह मार्ग सिर्फ रास्ता नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी की सुविधा है। इसके बंद होने से बच्चों का स्कूल जाना, मरीजों का अस्पताल पहुंचना और सामान्य आवागमन भी प्रभावित हो रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह भूमि सरकारी (ग्राम समाज) की है और इसे सार्वजनिक उपयोग के लिए ही रखा गया था। ऐसे में किसी भी व्यक्ति का इसे निजी कब्जे में लेना गैरकानूनी है। इसके बावजूद दबंगों ने दीवार और पौधे लगा कर रास्ता बंद कर दिया, जो ग्रामीणों की शिकायतों का मुख्य कारण बना हुआ है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यदि प्रशासन समय रहते कार्रवाई नहीं करता है तो इस अवैध कब्जे को और मजबूती मिल सकती है। उन्होंने कहा कि चकबंदी अभिलेखों के आग से नष्ट होने की स्थिति में भी सरकारी रिकॉर्ड से यह साबित किया जा सकता है कि यह भूमि सार्वजनिक उपयोग के लिए है।
ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी (एसडीएम) से तत्काल मौके पर पहुंचकर जांच करने की मांग की है। उनका कहना है कि एसडीएम को मौके पर जाकर अवैध कब्जे को हटवाना चाहिए और चकमार्ग को पुनः बहाल करना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई गलत व्यक्ति इस मार्ग पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है, तो उस पर सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
ग्रामीणों ने कहा कि वे शांति से समस्या का समाधान चाहते हैं, लेकिन अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे आगे बड़े आंदोलन की ओर भी जा सकते हैं।
यह सवाल भी उठता है कि आखिर चकमार्ग जैसी सार्वजनिक भूमि पर कब्जा कैसे संभव हो गया?
क्या प्रशासन ने समय पर जांच नहीं की?
और क्या इस मामले में दबंगों का किसी तरह संरक्षण है?
चाहे वह विकास हो या कानून, लेकिन यदि आम जनता के रास्ते ही बंद हो जाएं तो समाज का संतुलन बिगड़ जाता है। बूचपुर गांव के ग्रामीणों की यह मांग सिर्फ एक रास्ते के लिए नहीं, बल्कि उनके अधिकारों के लिए है। अब प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि वह जल्द से जल्द मौके पर जांच कर, अवैध कब्जा हटवाकर चकमार्ग बहाल कराए और ग्रामीणों को राहत दिलाए।
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