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Act of Kindness : सड़क पर तड़पता रहा घायल युवक, रिक्शा चालक ने दिखाई इंसानियत

कालपी में दर्दनाक सड़क हादसा: घायल युवक तड़पता रहा सड़क किनारे, लोग बन गए तमाशबीन — रिक्शा चालक ने दिखाई इंसानियत, अस्पताल पहुंचाया

जालौन। उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के कालपी क्षेत्र से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो न सिर्फ मानवता को झकझोर देती है बल्कि समाज की संवेदनहीनता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है। कालपी में यमुना किनारे सड़क पर हुए एक दर्दनाक हादसे में एक युवक गंभीर रूप से घायल होकर सड़क किनारे तड़पता रहा, पर राहगीर उसे देखते हुए भी गुजरते रहे। कोई उसके पास नहीं रुका, किसी ने मदद का हाथ नहीं बढ़ाया। लेकिन उसी दौरान एक रिक्शा चालक ने इंसानियत की मिसाल पेश की और अपनी जान जोखिम में डालकर घायल को अस्पताल पहुंचाया।


दुर्घटना का स्थल: यमुना किनारे दौलतपुर के पास दर्दनाक टक्कर

यह घटना कालपी के भोगनीपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले दौलतपुर गांव के पास की है। जानकारी के मुताबिक, सोमवार की देर शाम कालपी निवासी शहजाद (उम्र लगभग 28 वर्ष) किसी काम से यमुना किनारे सड़क मार्ग से पैदल जा रहा था। तभी पीछे से तेज रफ्तार में आ रहे एक अज्ञात वाहन ने उसे जोरदार टक्कर मार दी।
टक्कर इतनी भीषण थी कि शहजाद सड़क किनारे बनी बाउंड्री वॉल से जा टकराया। उसकी कान की लोब कट गई, और शरीर के कई हिस्सों पर गहरी चोटें आईं। सड़क पर गिरने के बाद वह दर्द से कराहता रहा, लेकिन वहां से गुजरने वाले लोगों में से किसी ने भी उसकी मदद करना जरूरी नहीं समझा।


लोग बन गए तमाशबीन, घायल सड़क किनारे तड़पता रहा

घटना स्थल पर पड़े युवक के आसपास उसका सामान बिखरा हुआ था—एक थैला, कुछ दस्तावेज़ और मोबाइल फोन सड़क पर फैले पड़े थे। राहगीर व वाहन चालक मौके से गुजरते तो रहे, पर किसी ने भी न तो उसे उठाने की कोशिश की और न ही पुलिस या एंबुलेंस को सूचना दी।
करीब 15 से 20 मिनट तक शहजाद सड़क किनारे तड़पता रहा। कुछ लोगों ने दूर से वीडियो जरूर बनाया, लेकिन कोई पास नहीं आया। यह दृश्य न केवल हृदय विदारक था, बल्कि यह भी दर्शाता है कि आधुनिक समाज में सहानुभूति और संवेदना कितनी कम होती जा रही है।


रिक्शा चालक ने पेश की मिसाल: “इंसानियत अभी जिंदा है”

इसी बीच, वहां से राजघाट कालपी निवासी रिक्शा चालक राजा अपने रिक्शे से गुजर रहा था। जैसे ही उसने सड़क किनारे घायल युवक को तड़पते देखा, उसने बिना देर किए अपना रिक्शा रोका और उसके पास पहुंचा।
राजा ने सबसे पहले 108 एंबुलेंस सेवा को कॉल किया, लेकिन करीब 20 मिनट बीत जाने के बाद भी एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची।
हालात बिगड़ते देख उसने किसी का इंतजार करना उचित नहीं समझा। उसने खुद घायल युवक को उठाया, उसके सामान को समेटा और अपने रिक्शे पर बिठाकर सीधे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) कालपी पहुंच गया।

राजा ने बताया —

“जब मैंने देखा कि लोग सिर्फ देखते जा रहे हैं और कोई मदद नहीं कर रहा, तो मेरा दिल नहीं माना। मैंने सोचा, अगर मैं भी यूं ही गुजर गया तो उस लड़के की जान चली जाएगी। इंसानियत के नाते मैंने उसे रिक्शे पर लादकर अस्पताल पहुंचाया।”


अस्पताल में प्राथमिक उपचार, हालत नाजुक देख किया गया रेफर

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कालपी में तैनात वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अशोक चक्र ने बताया कि घायल युवक की हालत बेहद गंभीर थी।
डॉ. चक्र के अनुसार —

“युवक को सिर और कान पर गंभीर चोटें आई हैं। शरीर के कई हिस्सों में गहरे घाव हैं। प्राथमिक उपचार के बाद उसे हालत नाजुक देखते हुए जिला मेडिकल कॉलेज उरई रेफर कर दिया गया है।”

वहीं, पुलिस ने भी मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल अज्ञात वाहन चालक की तलाश की जा रही है।


सड़क सुरक्षा और एंबुलेंस सेवा पर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा व्यवस्था और एंबुलेंस सेवा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए कई योजनाएं शुरू की गई हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है।
दुर्घटना के बाद यदि समय पर एंबुलेंस पहुंच जाती, तो शायद घायल की हालत इतनी गंभीर नहीं होती।

स्थानीय लोगों का कहना है कि दौलतपुर के पास का सड़क मार्ग बेहद खतरनाक है, वहां अक्सर वाहन तेज गति से चलते हैं। इसके बावजूद वहां स्पीड ब्रेकर, चेतावनी संकेत या स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुरक्षा व्यवस्थाएं नहीं हैं।


मानवता की मिसाल बना रिक्शा चालक ‘राजा’

घटना के बाद जब यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो लोगों ने रिक्शा चालक राजा की जमकर सराहना की।
लोगों ने कहा कि जहां संवेदनाएं मरती जा रही हैं, वहां राजा ने “इंसानियत” को जिंदा रखा। कई स्थानीय सामाजिक संगठनों ने भी उसे सम्मानित करने की घोषणा की है।
कुछ लोगों ने यह भी सुझाव दिया कि प्रशासन को ऐसे लोगों को प्रोत्साहित करना चाहिए ताकि समाज में दूसरों के लिए मदद करने की भावना मजबूत हो।


चश्मदीदों की जुबानी: “लोग रुकते हैं, पर मदद नहीं करते”

घटनास्थल के आसपास मौजूद कुछ लोगों ने बताया कि सड़क हादसे रोजाना होते हैं लेकिन अब लोग मदद करने से डरते हैं।
एक दुकानदार ने कहा —

“आजकल लोग पुलिस झंझट से बचने के लिए घायल के पास नहीं जाते। डर रहता है कि कहीं गवाह न बना लिया जाए या पूछताछ में न फंस जाएं। लेकिन यह डर हमें अमानवीय बना रहा है।”


पुलिस ने शुरू की जांच, वाहन चालक की तलाश जारी

भोगनीपुर थाना प्रभारी ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और सड़क पर पड़े सामान को कब्जे में लिया गया है।
फिलहाल CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि वाहन की पहचान की जा सके। पुलिस ने अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।


समाज के लिए सीख: एक रिक्शा चालक से मिली बड़ी प्रेरणा

यह घटना समाज के लिए एक आईना है — जहां एक रिक्शा चालक सीमित साधनों के बावजूद इंसानियत निभा गया, वहीं कई शिक्षित और सक्षम लोग मूकदर्शक बने रहे।
राजा का यह कदम हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि अगर हर व्यक्ति ऐसे समय पर मदद के लिए आगे बढ़े, तो कई जानें बचाई जा सकती हैं।

जालौन के कालपी से आई यह खबर सिर्फ एक सड़क हादसे की कहानी नहीं है, बल्कि यह समाज की संवेदनहीनता और एक साधारण इंसान की असाधारण इंसानियत का प्रतीक बन गई है।
जहां प्रशासन को एंबुलेंस व्यवस्था और सड़क सुरक्षा सुधारने की जरूरत है, वहीं नागरिकों को भी यह याद रखना चाहिए कि मदद करना कोई अपराध नहीं, बल्कि सबसे बड़ा धर्म है।

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