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Illegal Timber Scam Exposed: हरी लकड़ी की तस्करी और घटिया सड़क निर्माण ने खोली प्रशासन की पोल

हमीरपुर (उत्तर प्रदेश)।
जनपद हमीरपुर में हरे पेड़ों की अवैध कटान का मामला एक बार फिर सामने आ गया है। इस बार मामला केवल पर्यावरण नुकसान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक बड़ा जानलेवा हादसा होते-होते टल गया। बेरी के हरे पेड़ों की लकड़ी से लदी एक ट्राली अचानक सड़क में धंस गई, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। गनीमत यह रही कि घटना के समय वहां कोई राहगीर या अन्य वाहन मौजूद नहीं था, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।

यह घटना जलालपुर थाना क्षेत्र के टाई गांव के पास की बताई जा रही है, जहां नमामि गंगे योजना के अंतर्गत बनाई गई सड़क की गुणवत्ता पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।


नमामि गंगे योजना की सड़क बनी हादसे की वजह

स्थानीय लोगों के अनुसार जिस सड़क पर यह हादसा हुआ, वह नमामि गंगे परियोजना के तहत कुछ समय पहले ही बनाई गई थी। बावजूद इसके सड़क जगह-जगह से उखड़ी हुई है और हल्का दबाव पड़ते ही धंस जा रही है। सोमवार शाम जब बेरी की हरी लकड़ी से भरी ट्राली इस सड़क से गुजर रही थी, तभी सड़क अचानक धंस गई और पूरी ट्राली जमीन में धंस गई।

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि अगर ट्राली की रफ्तार तेज होती या आसपास लोग मौजूद होते, तो कई जानें जा सकती थीं। यह हादसा न केवल अवैध लकड़ी तस्करी की पोल खोलता है, बल्कि सरकारी योजनाओं में हो रहे भ्रष्टाचार की ओर भी इशारा करता है।


घटना के बाद चालक ट्रैक्टर लेकर फरार

हादसे के तुरंत बाद ट्राली का चालक ट्रैक्टर लेकर मौके से फरार हो गया। ट्राली में भरी लकड़ी वहीं फंसी रह गई। चालक के फरार होने से इस बात की आशंका और गहरा गई है कि लकड़ी प्रतिबंधित और अवैध रूप से काटी गई थी। यदि लकड़ी वैध होती, तो चालक मौके से भागने के बजाय प्रशासन को सूचना देता।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में अक्सर रात के समय ट्रैक्टर-ट्रालियों में लकड़ी की ढुलाई होती देखी जाती है, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।


हरे पेड़ों की कटान से पर्यावरण पर संकट

ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इस क्षेत्र में दिन-रात हरे पेड़ों की अवैध कटान जारी है। बेरी जैसे हरे और उपयोगी पेड़ों को काटकर खुलेआम लकड़ी की तस्करी की जा रही है। इससे न केवल पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर भी खतरा मंडरा रहा है।

पेड़ों की कटान से:

  • भू-क्षरण बढ़ रहा है

  • गर्मी का प्रकोप बढ़ रहा है

  • वर्षा जल संरक्षण प्रभावित हो रहा है

  • ग्रामीण इलाकों में प्राकृतिक छाया और हरियाली खत्म हो रही है

इसके बावजूद वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।


स्थानीय लोगों का फूटा गुस्सा

घटना के बाद मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हो गए। लोगों ने प्रशासन और वन विभाग के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार अवैध कटान की शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती।

ग्रामीणों का आरोप है कि:

  • अवैध लकड़ी माफिया को संरक्षण मिल रहा है

  • वन विभाग और पुलिस की मिलीभगत से कटान हो रही है

  • केवल छोटी कार्रवाई कर मामला दबा दिया जाता है

लोगों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।


सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार के आरोप

यह मामला केवल अवैध लकड़ी तक सीमित नहीं है। जिस सड़क पर ट्राली धंसी, उसकी गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण में मानकों की अनदेखी की गई है।

यदि सड़क मजबूत होती, तो भारी वाहन के गुजरने से वह धंसती नहीं। इससे साफ जाहिर होता है कि:

  • घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया

  • निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार हुआ

  • ठेकेदार और संबंधित विभागों की लापरवाही सामने आई

लोगों ने नमामि गंगे योजना के तहत बने अन्य कार्यों की भी जांच कराने की मांग की है।


प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

घटना के कई घंटे बाद तक न तो वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और न ही पुलिस द्वारा कोई ठोस कार्रवाई दिखाई दी। ट्राली में भरी लकड़ी अब भी सवाल बनकर खड़ी है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि:

  • लकड़ी किसने कटवाई?

  • कहां से लाई गई?

  • किसे सप्लाई की जानी थी?

  • और किसके संरक्षण में यह सब हो रहा है?

यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो ऐसे हादसे भविष्य में किसी की जान भी ले सकते हैं।


जनहित में सख्त कार्रवाई की जरूरत

यह घटना प्रशासन के लिए चेतावनी है। अवैध कटान, भ्रष्टाचार और लापरवाही अगर इसी तरह जारी रही, तो इसके गंभीर परिणाम सामने आएंगे। जरूरत है कि:

  • अवैध लकड़ी तस्करी पर सख्त कार्रवाई हो

  • वन विभाग की जवाबदेही तय की जाए

  • सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जांच कराई जाए

  • दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों पर मुकदमा दर्ज हो

तभी जनता का भरोसा सिस्टम पर कायम रह पाएगा।

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