लखीमपुर खीरी के गोला कस्बे में बीते 10 दिनों से पेयजल आपूर्ति की एक प्रमुख पाइपलाइन फटी पड़ी है, जिसके चलते प्रतिदिन लाखों लीटर पानी सड़कों पर बहकर बर्बाद हो रहा है। यह मामला गोला के व्यस्ततम इलाके विकास चौराहा स्थित पलिया बस अड्डा–खुटार रोड का है, जहां से होकर गुजरने वाले स्थानीय नागरिक, दुकानदार और राहगीर इस समस्या से लगातार जूझ रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, हर दिन दो बार पानी की सप्लाई होने पर भारी मात्रा में पानी सड़क पर बह जाता है। इससे न केवल जल संसाधनों की बर्बादी हो रही है, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में जलभराव, गंदगी और सड़क क्षति जैसी समस्याएं भी उत्पन्न हो रही हैं।

स्थानीय निवासियों की शिकायतें, लेकिन कार्रवाई शून्य
क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि इस समस्या को लेकर लगभग 5 दिन पहले ही नगर पालिका की हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके बावजूद अब तक किसी भी प्रकार की मरम्मत या निरीक्षण कार्य नहीं किया गया है।
स्थानीय दुकानदारों का आरोप है कि प्रशासनिक लापरवाही के चलते स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है। दुकानदारों का कहना है कि पानी के लगातार बहाव से उनकी दुकानों के सामने की सड़क खराब हो रही है, जिससे ग्राहकों को आने-जाने में परेशानी हो रही है।
जनप्रतिनिधियों और संगठनों को दी गई सूचना
मामले की गंभीरता को देखते हुए अनूप गुप्ता, जो कि भारतीय बजरंग दल के जिला अध्यक्ष हैं, को इसकी सूचना दी गई। उन्होंने तत्परता दिखाते हुए नगर पालिका गोला और जल निगम के संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया।
सूत्रों के अनुसार, उन्होंने जल निगम के जूनियर इंजीनियर आदर्श को भी इस समस्या के बारे में अवगत कराया। हालांकि, सूचना दिए जाने के बाद भी संबंधित विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
अधिकारियों की लापरवाही पर उठे सवाल
अनूप गुप्ता ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि जब बार-बार शिकायत और सूचना देने के बावजूद भी अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, तो यह स्पष्ट रूप से उनकी लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैये को दर्शाता है।
उन्होंने कहा,
“यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक ओर सरकार जल संरक्षण को लेकर बड़े-बड़े अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर लाखों लीटर पानी यूं ही बह रहा है और जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।”
जल संकट के बीच पानी की बर्बादी — एक बड़ा सवाल
गौरतलब है कि देश के कई हिस्सों में गर्मियों के दौरान जल संकट गहराता जा रहा है। ऐसे में इस प्रकार की घटनाएं प्रशासनिक तंत्र की कार्यक्षमता पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
गोला जैसे कस्बों में जहां कई क्षेत्रों में नियमित जल आपूर्ति भी चुनौती बनी रहती है, वहीं एक फटी पाइपलाइन के कारण प्रतिदिन लाखों लीटर पानी का व्यर्थ बह जाना एक बड़ी विडंबना है।
स्थानीय लोगों की मांग — तुरंत हो मरम्मत, जिम्मेदारों पर कार्रवाई
स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों ने प्रशासन से मांग की है कि इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान किया जाए। उनका कहना है कि पाइपलाइन की मरम्मत में हो रही देरी से न केवल पानी की बर्बादी हो रही है, बल्कि क्षेत्र में स्वच्छता और यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
अनूप गुप्ता ने भी मांग की है कि:
- दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए
- पाइपलाइन की तत्काल मरम्मत कराई जाए
- भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए नियमित निरीक्षण व्यवस्था सुनिश्चित की जाए
प्रशासन की चुप्पी — कब होगी कार्रवाई?
इस पूरे मामले में अभी तक नगर पालिका या जल निगम की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लगातार शिकायतों और जनदबाव के बावजूद कार्रवाई का अभाव प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है।
अब सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक आम जनता इस तरह की समस्याओं से जूझती रहेगी और कब जिम्मेदार विभाग अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे।
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