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Private company controversy-तनख्वाह न मिलने से परेशान मजदूरों का हंगामा, आत्मदाह की चेतावनी से मचा हड़कंप

रिपोर्ट — गाजीपुर संवाददाता

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जनपद से श्रमिक शोषण से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां स्मार्ट मीटर लगाने का काम कर रही एक निजी कंपनी पर मजदूरों की मजदूरी रोकने और जबरन कटौती करने के आरोप लगे हैं। मामला जमानियां कोतवाली क्षेत्र के पक्का पुल के नीचे चल रहे कार्यस्थल का बताया जा रहा है। मजदूरी न मिलने से नाराज श्रमिकों में भारी आक्रोश है और एक मजदूर ने तो कंपनी कार्यालय के सामने आत्मदाह करने तक की चेतावनी दे दी है।

घटना सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर हड़कंप मच गया है और श्रमिकों के शोषण को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

कई महीनों से चल रहा स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य

जानकारी के अनुसार जमानियां क्षेत्र में पिछले कुछ महीनों से एक निजी कंपनी द्वारा स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य कराया जा रहा है। इस परियोजना के तहत स्थानीय मजदूरों को काम पर रखा गया था। मजदूरों का आरोप है कि उन्हें नियमित भुगतान का आश्वासन देकर काम कराया गया, लेकिन तय समय पर मजदूरी नहीं दी गई।

श्रमिकों का कहना है कि उन्होंने लगातार मेहनत कर काम पूरा किया, लेकिन कंपनी द्वारा उनका मेहनताना रोक लिया गया।

मजदूरी न मिलने से बढ़ी परेशानी

मजदूरों के अनुसार जनवरी और दिसंबर माह की मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया, बल्कि उनके मेहनताना से जबरन कटौती भी कर ली गई। कुछ श्रमिकों का दावा है कि अक्टूबर माह में नियुक्ति के बाद से ही भुगतान में अनियमितता शुरू हो गई थी।

लगातार मजदूरी न मिलने के कारण मजदूर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। कई श्रमिकों ने बताया कि घर चलाना मुश्किल हो गया है और परिवार की जरूरतें पूरी करना चुनौती बन गया है।

एक मजदूर ने कहा,
“हम रोज मेहनत करते हैं, लेकिन तनख्वाह नहीं मिल रही। आखिर हम अपने परिवार का पेट कैसे पालें?”

आत्मदाह की चेतावनी से मचा हड़कंप

स्थिति उस समय गंभीर हो गई जब एक मजदूर ने कथित रूप से कंपनी कार्यालय के सामने आत्मदाह करने की चेतावनी दे दी। मजदूर का कहना है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो वह मजबूरी में कठोर कदम उठाने को विवश होगा।

इस बयान के बाद स्थानीय प्रशासन और लोगों में चिंता बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि समय रहते समस्या का समाधान न हुआ तो स्थिति बिगड़ सकती है।

निजी कंपनी पर शोषण के आरोप

मजदूरों ने आरोप लगाया है कि निजी कंपनी के कर्मचारी दबंगई और मनमानी कर रहे हैं। उनका कहना है कि स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के नाम पर नियुक्त किया जाता है, लेकिन बाद में उनका शोषण किया जाता है।

श्रमिकों का आरोप है कि शिकायत करने पर उन्हें टाल दिया जाता है और भुगतान को लेकर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया जाता।

सरकार की सख्ती के बावजूद सवाल

उत्तर प्रदेश सरकार समय-समय पर श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा और शोषण रोकने के निर्देश देती रही है। हाल ही में सरकार ने स्पष्ट कहा था कि मजदूरों के शोषण की शिकायत मिलने पर संबंधित कंपनी और जिम्मेदार कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इसके बावजूद इस तरह की घटनाएं सामने आना प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

स्थानीय लोगों में नाराजगी

घटना के बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों में भी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि मजदूरों को समय पर भुगतान नहीं मिलेगा तो रोजगार योजनाओं पर लोगों का भरोसा कमजोर हो जाएगा।

स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मामले की तत्काल जांच कराने और मजदूरों का बकाया भुगतान दिलाने की मांग की है।

प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग

मजदूरों ने जिला प्रशासन और श्रम विभाग से मांग की है कि:

  • कंपनी के भुगतान रिकॉर्ड की जांच की जाए

  • मजदूरों की बकाया मजदूरी तुरंत दिलाई जाए

  • जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई हो

  • भविष्य में श्रमिक शोषण रोकने के लिए निगरानी बढ़ाई जाए

श्रमिकों के भविष्य पर बड़ा सवाल

यह मामला केवल एक कंपनी या एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश में निजी कंपनियों में काम कर रहे हजारों श्रमिकों की स्थिति को भी उजागर करता है। रोजगार की तलाश में काम करने वाले युवा अक्सर अनुबंध और भुगतान संबंधी नियमों से अनजान होते हैं, जिसका फायदा उठाकर उनका शोषण किया जाता है।

निष्कर्ष

गाजीपुर के जमानियां क्षेत्र का यह मामला श्रमिक अधिकारों और निजी कंपनियों की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाता है। मजदूरी न मिलने से परेशान श्रमिकों की स्थिति चिंताजनक है और आत्मदाह जैसी चेतावनी प्रशासन के लिए बड़ा संकेत है कि समस्या को तत्काल गंभीरता से लिया जाए।

अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या मजदूरों को उनका हक मिल पाता है या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह लंबित रह जाता है।

श्रमिकों की निगाहें अब प्रशासनिक कार्रवाई और न्याय पर टिकी हुई हैं।

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