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Fazilnagar Kavi Sammelan -फाजिलनगर में भव्य कवि सम्मेलन व पत्रकार सम्मान समारोह, सैकड़ों लोग हुए सम्मानित

स्लग : फाजिलनगर में कवि सम्मेलन व पत्रकार सम्मान समारोह आयोजित

लोकेशन : फाजिलनगर, कुशीनगर


फाजिलनगर में भव्य कवि सम्मेलन एवं पत्रकार सम्मान समारोह का आयोजन

सैकड़ों कवि, साहित्यकार, पत्रकार व समाजसेवियों को किया गया सम्मानित

एंकर :
कुशीनगर जनपद के फाजिलनगर विधानसभा क्षेत्र में साहित्य, पत्रकारिता और समाजसेवा को समर्पित एक भव्य आयोजन देखने को मिला। फाजिलनगर स्थित जूनियर हाईस्कूल के प्रांगण में वरिष्ठ कवि, साहित्यकार एवं फाजिलनगर विधानसभा क्षेत्र से निर्दल प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ चुके नन्दलाल विद्रोही के तत्वावधान में कवि सम्मेलन एवं पत्रकार सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश-प्रदेश से आए कवियों, साहित्यकारों, पत्रकारों और समाजसेवियों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इसके पश्चात मंच पर आमंत्रित कवियों ने एक से बढ़कर एक रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कवियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से देशभक्ति, सामाजिक सरोकार, किसान-मजदूरों की समस्याएं, लोकतंत्र और समसामयिक विषयों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। कवि सम्मेलन के दौरान श्रोताओं की तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा प्रांगण गूंज उठा और माहौल साहित्यिक रंग में रंग गया।

इस अवसर पर पत्रकारों, कवियों, साहित्यकारों एवं समाजसेवियों को अंग वस्त्र भेंट कर तथा माल्यार्पण कर सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह में उपस्थित अतिथियों ने पत्रकारिता और साहित्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दोनों समाज को दिशा देने का कार्य करते हैं और लोकतंत्र की मजबूत नींव हैं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आयोजनकर्ता नन्दलाल विद्रोही ने कहा कि साहित्य और पत्रकारिता समाज का आईना हैं। उन्होंने कहा कि साहित्यकार अपनी लेखनी से समाज को जागरूक करते हैं, वहीं पत्रकार सच्चाई को सामने लाकर लोकतंत्र को मजबूत बनाते हैं। ऐसे आयोजनों से न केवल साहित्यकारों और पत्रकारों को सम्मान मिलता है, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा और चेतना का संचार भी होता है।

बाइट : नन्दलाल विद्रोही (वरिष्ठ कवि एवं पूर्व प्रत्याशी, फाजिलनगर विधानसभा)
“साहित्य और पत्रकारिता समाज को जोड़ने का काम करते हैं। इनसे सामाजिक चेतना जागृत होती है और लोकतंत्र को मजबूती मिलती है।”

वक्ताओं ने कहा कि ग्रामीण अंचल में इस तरह के साहित्यिक आयोजनों से युवा पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने में मदद मिलती है और सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने नन्दलाल विद्रोही के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय गणमान्य नागरिक, जनप्रतिनिधि, शिक्षक, छात्र, साहित्य प्रेमी और पत्रकार उपस्थित रहे। अंत में आयोजक की ओर से सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया और कार्यक्रम का समापन हुआ।

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