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Buldhana Hospital Negligence : जच्चा-बच्चा की मौत पर किसान यूनियन और किन्नर समाज का प्रदर्शन

बुलंदशहर जिले में आज एक दुखद घटना के बाद किसान यूनियन और किन्नर समाज ने मिलकर प्राइवेट अस्पताल प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। घटना लोहरा गांव, थाना जहांगीराबाद के जानवी हॉस्पिटल की है, जहां ऑपरेशन के दौरान जच्चा-बच्चा की मृत्यु हो गई।

सूत्रों के अनुसार, भारतीय किसान यूनियन धरतीपुत्र के राष्ट्रीय प्रमुख सचिव एवं जिला अध्यक्ष अशोक शर्मा के नेतृत्व में किसान यूनियन और किन्नर समाज के लोग मलका पार्क में एकत्र हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल में ऑपरेशन के लिए सही उपकरण उपलब्ध नहीं थे, और झोलाछाप डॉक्टरों के द्वारा ऑपरेशन किया गया। इस लापरवाही के कारण न केवल जच्चा-बच्चा की जान गई, बल्कि पूरे इलाके में अस्पताल और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर भारी सवाल खड़े हो गए

प्रदर्शनकारियों ने मलका पार्क से कलेक्ट्रेट की ओर मार्च किया। इस दौरान उन्होंने पुलिस और प्रशासन के सामने, अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की मांग को जोर-शोर से उठाया। किसान यूनियन और किन्नर समाज ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम सिटी मजिस्ट्रेट और एसपी सिटी को एक ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में मांग की गई है कि:

  1. अस्पताल के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जाए।

  2. अस्पताल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाए।

  3. अस्पताल का रजिस्ट्रेशन लिस्ट निरस्त किया जाए।

ग्रामीण और समाजिक प्रतिक्रिया:

घटना के बाद ग्रामीणों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला। किन्नर समाज ने इसे स्वास्थ्य व्यवस्था में घोर लापरवाही और गरीबों के साथ अन्याय करार दिया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि यह पूरे जिले में प्राइवेट अस्पतालों की लापरवाही और स्वास्थ्य सुरक्षा की कमी को उजागर करती है।

अशोक शर्मा ने कहा कि हम केवल मृतक परिवार के लिए न्याय नहीं चाहते, बल्कि पूरे जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार और लापरवाह अस्पतालों पर नियंत्रण सुनिश्चित करना हमारा उद्देश्य है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो किसान यूनियन और किन्नर समाज और बड़े आंदोलन के लिए तैयार हैं।

गुड्डी, किन्नर
“हमारा समाज हमेशा न्याय और समानता की मांग करता रहा है। इस लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

विशेषज्ञों का कहना है कि इस घटना से स्पष्ट होता है कि छोटे और कम संसाधन वाले प्राइवेट अस्पतालों में स्वास्थ्य सुरक्षा की गंभीर कमी है। वहीं, प्रशासनिक जवाबदेही और नियमित निरीक्षण की आवश्यकता भी सामने आई है।

अभी तक अस्पताल प्रशासन ने कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन पुलिस और प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। स्थानीय अधिकारी यह सुनिश्चित करने में जुटे हैं कि दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।

यह घटना औरैया और बुलंदशहर जैसे जिलों में स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारी निगरानी पर सवाल खड़े करती है। वहीं, किसान यूनियन और किन्नर समाज का यह आंदोलन साबित करता है कि जनता अपनी सुरक्षा और न्याय के लिए सख्त कदम उठा सकती है

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