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Brahmin Protest Erupts : वेब सीरीज़ “घूसखोर पंडित” पर भड़का ब्राह्मण समाज -बुलंदशहर की सड़कों पर हुआ जोरदार प्रदर्शन

बुलंदशहर में रविवार को वेब सीरीज “घूसखोर पंडित” के खिलाफ ब्राह्मण समाज का आक्रोश सड़कों पर फूट पड़ा।
समाज के सैकड़ों लोगों ने मुख्य कलाकार मनोज बाजपेयी और उनकी टीम का पुतला फूंका, नारेबाजी की और प्रशासन से इस वेब सीरीज पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सीरीज के माध्यम से जानबूझकर ब्राह्मण समाज की छवि धूमिल करने की कोशिश की जा रही है।


“घूसखोर पंडित” वेब सीरीज पर क्यों भड़का आक्रोश

ब्राह्मण समाज का कहना है कि “घूसखोर पंडित” नाम ही अपने आप में एक पूरे समुदाय का अपमान करता है।
उनका आरोप है कि इस सीरीज के कंटेंट में ब्राह्मणों को भ्रष्ट, स्वार्थी और घूसखोर के रूप में दिखाया गया है, जो धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता है।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि कलाकारों और निर्माताओं ने “लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता” के नाम पर जाति विशेष का अपमान किया है, जो किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


खुर्जा और जेवर में उग्र हुआ विरोध

यह विरोध केवल बुलंदशहर शहर तक सीमित नहीं रहा।
खुर्जा, जेवर और सिकंदराबाद क्षेत्र में भी ब्राह्मण समाज के लोगों ने प्रदर्शन किया।
खुर्जा में प्रदर्शनकारियों ने महर्षि परशुराम भृगु सदन से लेकर जेवर अड्डे तक रोड शो निकालकर अपना गुस्सा जाहिर किया।
सैकड़ों युवाओं ने पोस्टर, तख्तियां और बैनर लेकर सरकार से वेब सीरीज को तत्काल बैन करने की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान “ब्राह्मण समाज की अवमानना बंद करो”, “मनोज बाजपेयी माफी मांगो”, “धर्म का अपमान अब नहीं सहेंगे” जैसे नारे पूरे इलाके में गूंजते रहे।


पुतला दहन और नारेबाजी से गूंजा बुलंदशहर

खुर्जा और बुलंदशहर दोनों जगहों पर ब्राह्मण समाज के वरिष्ठ नागरिकों, युवाओं और महिलाओं ने भाग लिया।
सभी ने मिलकर वेब सीरीज के कलाकारों और मेकर्स का पुतला फूंका।
भीड़ ने मनोज बाजपेयी और उनकी टीम के खिलाफ जमकर नारे लगाए।

विरोध कर रहे लोगों का कहना था कि “मनोज बाजपेयी जैसे वरिष्ठ कलाकारों को सामाजिक जिम्मेदारी का अहसास होना चाहिए।”
अगर कोई कलाकार या निर्देशक समाज के किसी वर्ग को नीचा दिखाने की कोशिश करेगा, तो उसका विरोध किया जाएगा।


ब्राह्मण समाज के नेताओं का बयान

विरोध प्रदर्शन के दौरान समाज के कई स्थानीय नेताओं ने भी मंच से अपनी बात रखी।
एक वक्ता ने कहा —

“हम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन किसी की भावनाओं का अपमान करना स्वतंत्रता नहीं कहलाता। ‘घूसखोर पंडित’ नाम से वेब सीरीज बनाकर निर्माताओं ने करोड़ों ब्राह्मणों के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाई है।”

एक अन्य वक्ता ने कहा —

“लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात कहने का अधिकार है, लेकिन किसी समुदाय को नीचा दिखाना या धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना संविधान के खिलाफ है।”


प्रशासन की भूमिका और सुरक्षा व्यवस्था

विरोध की सूचना मिलते ही बुलंदशहर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए।
खुर्जा और हाटा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।
एसएचओ खुर्जा ने बताया कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और किसी भी प्रकार की हिंसा नहीं हुई।

अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया कि उनकी शिकायत को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि अगर किसी वेब सीरीज में किसी जाति या समुदाय का अपमान किया गया है तो कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।


सोशल मीडिया पर भी बढ़ा विरोध

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी “घूसखोर पंडित” वेब सीरीज का विरोध तेजी से बढ़ रहा है।
#BanGhoosKhorPandit, #RespectBrahmins, #BoycottManojBajpayee जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे हैं।
कई यूजर्स ने लिखा कि किसी भी धर्म या जाति का मज़ाक बनाना कला नहीं बल्कि असंवेदनशीलता है।
वहीं, कुछ लोगों ने इसे “सेक्शनल सेंसरशिप” कहकर ब्राह्मण समाज के विरोध को अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला बताया है।


फिल्म इंडस्ट्री में फिर उठा ‘कंटेंट की जिम्मेदारी’ का सवाल

यह पहली बार नहीं है जब किसी फिल्म या वेब सीरीज को लेकर धार्मिक या सामाजिक विवाद सामने आया हो।
इससे पहले “तांडव”, “आश्रम” और “काली” जैसी वेब सीरीज भी इसी तरह के आरोपों के कारण विवादों में रही थीं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर नियंत्रण की कमी के कारण ऐसे कंटेंट बन रहे हैं जो समाज के कुछ वर्गों को आहत करते हैं।
अब एक बार फिर सवाल उठ रहा है कि सेंसरशिप की अनुपस्थिति में क्या निर्माताओं को कोई जवाबदेही नहीं है?


लोकतंत्र में अभिव्यक्ति बनाम मर्यादा

विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि “लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जरूरी है, लेकिन उसकी भी सीमाएं हैं।”
ब्राह्मण समाज का तर्क है कि अगर कोई समुदाय बार-बार निशाने पर लिया जाता है, तो यह असहिष्णुता का प्रतीक है।

एक युवा प्रदर्शनकारी ने कहा —

“अगर ‘घूसखोर पंडित’ की जगह किसी और जाति का नाम होता, तो इतना बड़ा तूफान खड़ा हो जाता। लेकिन जब बात ब्राह्मणों की आती है, तो लोग मजाक समझ लेते हैं। अब ऐसा नहीं चलेगा।”


प्रशासन को सौंपी शिकायत, कार्रवाई की मांग

प्रदर्शन के बाद ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी और एसएसपी बुलंदशहर को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में मांग की गई कि “घूसखोर पंडित” वेब सीरीज पर तत्काल रोक लगाई जाए और इसके निर्माता, निर्देशक व कलाकारों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए।

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन को राज्यव्यापी स्तर पर ले जाया जाएगा।

बुलंदशहर में “घूसखोर पंडित” वेब सीरीज के खिलाफ हुआ यह विरोध सिर्फ एक शहर का आक्रोश नहीं, बल्कि समाज के भीतर बढ़ती असंवेदनशीलता के खिलाफ एक चेतावनी है।
लोकतंत्र में कला और अभिव्यक्ति जरूरी है, लेकिन जब वह किसी धर्म, जाति या संस्कृति के सम्मान को ठेस पहुंचाए, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।

फिलहाल प्रशासन ने स्थिति पर नियंत्रण बना रखा है, लेकिन यह विवाद आने वाले दिनों में और गहराने की संभावना रखता है।
अब देखना यह होगा कि वेब सीरीज के निर्माता और कलाकार इस जनभावना का सम्मान करते हैं या नहीं।

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