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Bhima Koregaon: हिंसा मामले में संभाजी भिड़े के शामिल होने के नहीं मिले सबूत, एफआईआर से हटाया गया नाम

नई दिल्ली। भीमा कोरेगांव मामले में पुणे पुलिस ने राज्य मानव अधिकार आयोग को दिए पत्र में इस बात का ज़िक्र किया कि हिंसा में शिव प्रतिष्ठान के संभाजी भिड़े के शामिल होने के कोई सबूत नहीं मिले हैं. इस लिए उनका नाम एफआईआर से हटा दिया गया है.

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आपको बता दें कि हिंसा के बाद प्रकाश आंबेडकर ने प्रेस कांफ्रेंस में आरोप लगाया कि दलितों पर हुए हमले का मास्टरमाइंड समस्त हिंदू अघाड़ी के मिलिंद एकबोटे और शिव प्रतिष्ठान के अध्यक्ष संभाजी भिड़े हैं. इन पर मामला दर्ज कर गिरफ्तारी की मांग की थी. आम्बेडकर ने कहा था कि ‘हिंसा के पीछे एकबोटे और भिड़े का हाथ हैं और इन दोनों पर वहीं मामला चलना चाहिए, जो याकूब मेमन पर चला था.’

कौन है संभाजी भिड़े?

न्यूक्लियर फिजिक्स में एमएससी भिड़े पुणे के फर्गुसन कॉलेज में प्रोफेसर रह चुके हैं. 1980 के दौर में उन्होंने शिव प्रतिष्ठान नाम की एक संस्था बनाई. मराठा युवा में भिड़े की काफ़ी पकड़ मानी जाती है. 2014 में सांगली दौरे आए मोदी ने कहा था कि, मैं सांगली खुद से नहीं आया बल्कि वे भिड़े गुरुजी के हुकुम पर आया हूं और वे हम सबके लिए एक आदर्श के समान है.

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2014 में मोद रायगढ़ पर भी शिवाजी महाराज ने समाधि स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में भी भिड़े गुरुजी के साथ शामिल हुए थे, जहां उन्होंने भिड़े गुरुजी के तारीफों के पुल बांधे थे.

भीमा कोरेगांव कमीशन के सामने पेश होंगे शरद पवार

भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने भी कहा था कि उनके पास भी हिंसा से जुड़ी जानकारी है. जिसके बाद कमीशन ने उन्होंने समन कर बयान दर्ज करने के लिए नोटिस जारी किया था. पवार आज 11:30 बजे अपना बयान दर्ज कराएंगे.

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