बहराइच जिले के रिसिया ब्लॉक से मनरेगा योजना को लेकर एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मनरेगा, जिसका उद्देश्य ग्रामीणों को रोजगार देना और गांवों में विकास कार्य कराना है, वही योजना रिसिया ब्लॉक की कई ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। यहां विकास कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है, जहां कागजों और ऑनलाइन सिस्टम में काम दिखाया जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
रिसिया ब्लॉक की ग्राम पंचायत बैजनाथपुर, बराई पारा, भागवनपुर कटघारा, भैसाही, गोंडौरा, करानिया, खुदद भारी, पारसपुर, रघुनाथपुर, रामबटी, तुला मझौवा और उत्तमापुर सहित कई गांवों में मनरेगा योजना पूरी तरह फेल होती दिखाई दे रही है।
सूत्रों और सामने आई तस्वीरों के अनुसार, मनरेगा के तहत कराए गए कथित विकास कार्यों में एक ही फोटो का इस्तेमाल कई अलग-अलग कार्यों की एंट्री के लिए किया गया है। साइड एंगल से ली गई तस्वीरों को अलग-अलग स्थानों का बताकर NMMS (नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम) पर अपलोड किया गया, जिससे सिस्टम की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि जिन जगहों पर विकास कार्य दिखाए गए हैं, वहां मौके पर केवल जमीन पर उगी घास नजर आ रही है। न तो कोई निर्माण कार्य हुआ है और न ही किसी तरह की मजदूरी होती दिख रही है। इसके बावजूद ऑनलाइन रिकॉर्ड में काम पूरा दिखाकर सरकारी धन की भारी निकासी कर ली गई।
मनरेगा में फर्जी मजदूरों की एंट्री कर भुगतान निकाले जाने का भी आरोप सामने आ रहा है। कागजों और पोर्टल पर मजदूरों की हाजिरी दर्ज है, लेकिन जब हकीकत जानने के लिए मौके पर पहुंचा गया, तो वहां न मजदूर मिले और न ही कोई कार्य चलता हुआ नजर आया।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल अधिकारियों की मॉनिटरिंग व्यवस्था पर उठ रहा है। ब्लॉक स्तर से लेकर जिला स्तर तक निगरानी की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों के कंधों पर है, उनकी भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। आरोप है कि फर्जी फोटो अपलोड कर मनरेगा के नाम पर लाखों रुपये की रकम निकाल ली गई और जिम्मेदार अधिकारी आंखों पर काली पट्टी बांधे बैठे रहे।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर चल रहे इस फर्जीवाड़े को किसका संरक्षण प्राप्त है?
क्या बिना मिलीभगत के एक ही फोटो से कई कार्यों की एंट्री संभव है?
और क्या NMMS सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर मनरेगा को लूट का जरिया बना दिया गया है?
जांच के अभाव में मनरेगा योजना में भ्रष्टाचार बेलगाम होता जा रहा है। सरकार की मंशा जहां गरीबों को रोजगार देने और गांवों के विकास की है, वहीं रिसिया ब्लॉक की कई ग्राम पंचायतों में यह योजना सिर्फ कागजों और मोबाइल ऐप तक सिमट कर रह गई है।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी अन्य घोटालों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।
फिलहाल, रिसिया ब्लॉक में मनरेगा की खुली पोल ने प्रशासनिक सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जरूरत है तत्काल जांच और सख्त कार्रवाई की, ताकि सरकारी योजनाओं को पलीता लगाने वालों पर लगाम लग सके।
Hind News 24×7 | हिन्द न्यूज़ Latest News & Information Portal