बदायूँ के जाफरपुर थाना इस्लामनगर क्षेत्र के एक गांव में रहने वाले वीरबहादुर पुत्र प्रहलाद सिंह ने अपनी 16 वर्षीय नाबालिग पुत्री शिवानी के साथ हुई दर्दनाक घटना का खुलासा किया। उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि उनकी बेटी को 28 नवंबर 2025 को स्कूल से अपहरण कर लिया गया था और कुछ समय बाद उसकी हत्या कर दी गई।

वीरबहादुर का आरोप है कि उनकी बेटी का अपहरण अनमोल पुत्र सुदेश, रोबिन पुत्र बिजेन्द्र सिंह और उनके अन्य साथियों ने मिलकर किया। आरोप है कि उन्हें नोएडा में एक मकान में ले जाकर नशीली दवाएं खिलाई गईं और कई दिनों तक बलात्कार किया गया।
परिजनों के अनुसार, 5 दिसंबर 2025 को शिवानी की हालत अचानक खराब हो गई। उन्हें तुरंत आशीर्वाद क्लीनिक खोडा ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसे हसीना बेगम मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल, सम्भल भेज दिया।
अस्पताल में भर्ती के कुछ ही समय बाद, शिवानी ने दम तोड़ दिया।
वीरबहादुर ने आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस ने मामले को दबाने की कोशिश की और अब तक केवल एक आरोपी अनमोल को गिरफ्तार किया है।
उन्होंने कहा कि आईजी और एसएसपी बदायूँ को लिखित शिकायत दी गई, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
परिवार का कहना है कि पुलिस की यह निष्क्रियता न्याय की प्रक्रिया में देरी और अपराधियों को बढ़ावा दे रही है।
घटना के बाद सोशल मीडिया पर #JusticeForShivani और अन्य हैशटैग के माध्यम से लोगों ने इस मामले पर गहरी चिंता व्यक्त की।
स्थानीय समाजसेवी और महिला संगठनों ने भी घटना की निंदा करते हुए कठोर कार्रवाई और दोषियों को जल्द गिरफ्तार करने की मांग की है।
वीरबहादुर ने कहा —
“मेरी बेटी ने अपनी पूरी जिंदगी देखी नहीं। नाबालिग होते हुए उसके साथ यह अत्याचार किसी पिता के लिए असहनीय है। हम चाहते हैं कि दोषियों को सजा मिले और न्याय मिले।”
परिजनों का कहना है कि मासूम बच्ची अब अपने माता-पिता के बिना जीवन जीने को मजबूर है। परिवार की पूरी जिंदगी ही इस घटना के बाद बदल गई है।
पुलिस ने बताया कि —
“मामले में रिपोर्ट दर्ज की गई है। एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है और बाकी आरोपियों की तलाश जारी है। सभी साक्ष्यों और मेडिकल रिपोर्ट की जांच की जा रही है।”
हालांकि, इस बयान से परिवार और स्थानीय लोगों का गुस्सा शांत नहीं हुआ।
यह घटना दहेज और बालिकाओं के खिलाफ अपराधों पर प्रकाश डालती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सामाजिक जागरूकता और पुलिस प्रशासन की सक्रियता के बिना ऐसे मामले लगातार बढ़ते रहेंगे।
बदायूँ में हुई यह घटना सिर्फ एक बेटी की मौत नहीं है, बल्कि समाज और कानून की व्यवस्था पर गहरा सवाल खड़ा करती है।
अब सबकी निगाहें इस पर हैं कि पुलिस और प्रशासन दोषियों को पकड़ने और न्याय दिलाने में कितने सक्षम हैं।
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