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School Prayer Controversy : बदायूं के सरकारी स्कूल में बच्चों से सामूहिक नमाज़ पढ़वाने का आरोप, गांव में बढ़ा विवाद

बदायूं: उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले से एक विवादित मामला सामने आया है, जहां एक सरकारी स्कूल में बच्चों को सामूहिक नमाज़ पढ़वाने का आरोप लगा है। इस घटना के सामने आने के बाद गांव में माहौल गर्म हो गया है और स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे को लेकर बहस छिड़ गई है। बताया जा रहा है कि स्कूल के दो शिक्षकों पर रमजान के महीने में कई बार बच्चों को नमाज़ पढ़ाने का आरोप लगाया गया है।

मामला सामने आने के बाद विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध जताया है। वहीं स्कूल प्रशासन की ओर से अभी तक इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। फिलहाल यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

स्कूल परिसर में नमाज़ पढ़वाने का आरोप

जानकारी के अनुसार यह मामला बदायूं जिले के अपर प्राइमरी यूपीएस स्कूल रिसौली का बताया जा रहा है। आरोप है कि स्कूल में पढ़ाने वाली एक महिला अध्यापिका और एक पुरुष शिक्षक ने बच्चों को सामूहिक रूप से नमाज़ पढ़वाई।

ग्रामीणों के मुताबिक यह घटना रमजान के महीने के दौरान कई बार हुई। आरोप है कि बच्चों को स्कूल के एक कमरे में इकट्ठा कर उनसे नमाज़ अदा करवाई गई। इस मामले की जानकारी जब गांव के कुछ लोगों को हुई तो उन्होंने इसका विरोध जताया।

बच्चों ने लगाए गंभीर आरोप

बताया जा रहा है कि कुछ बच्चों ने भी इस मामले को लेकर बयान दिया है। बच्चों के मुताबिक रीना मैम और अरविंद सर ने स्कूल के कमरे में उनसे सामूहिक नमाज़ पढ़वाई।

बच्चों ने यह भी आरोप लगाया कि यदि किसी ने इस बात का विरोध किया या बाहर बताया तो उसका स्कूल से नाम काट देने और कार्रवाई करने की धमकी दी गई थी। हालांकि इन आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है।

दूसरी अध्यापिका के विरोध के बाद रुकी नमाज़

मामले में एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि स्कूल की ही एक अन्य महिला अध्यापिका ने इस पूरे मामले का विरोध किया, जिसके बाद स्कूल परिसर में नमाज़ पढ़ाने की प्रक्रिया रोक दी गई।

ग्रामीणों के अनुसार यदि समय रहते विरोध नहीं होता तो यह सिलसिला आगे भी जारी रह सकता था।

गांव में मस्जिद न होने का भी मामला

कुछ लोगों का यह भी कहना है कि गांव में मस्जिद नहीं होने के कारण एक घर में भी सामूहिक नमाज़ पढ़ाने की व्यवस्था की गई थी। हालांकि इस मामले को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं और वास्तविक स्थिति की जांच की मांग उठने लगी है।

विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल का विरोध

जैसे ही यह मामला सामने आया, विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता स्कूल पहुंच गए और उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम का विरोध जताया।

कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकारी स्कूलों में किसी भी प्रकार की धार्मिक गतिविधि कराना गलत है और इससे शिक्षा का माहौल प्रभावित होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि ऐसा हुआ है तो यह बेहद गंभीर मामला है और इसकी जांच होनी चाहिए।

स्कूल स्टाफ से हुई तीखी नोकझोंक

मौके पर पहुंचे कार्यकर्ताओं और स्कूल स्टाफ के बीच इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस भी हुई। कुछ समय के लिए माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया।

विरोध कर रहे लोगों ने चेतावनी दी कि यदि स्कूल में नमाज़ पढ़ाई गई तो वे वहां हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे। इसके बाद कुछ देर तक दोनों पक्षों के बीच बहस चलती रही।

प्रशासन की ओर से अभी नहीं आया बयान

इस पूरे मामले को लेकर अभी तक प्रशासन या शिक्षा विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि मामला सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन को इसकी जानकारी दी गई है।

सूत्रों के मुताबिक यदि शिकायत दर्ज होती है तो शिक्षा विभाग इस मामले की जांच करा सकता है।

जांच की उठी मांग

ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।

वहीं कुछ लोगों का यह भी कहना है कि बिना जांच के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

शिक्षा के माहौल पर उठे सवाल

इस घटना के बाद सरकारी स्कूलों में धार्मिक गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। कई लोगों का मानना है कि स्कूल शिक्षा का स्थान है और यहां किसी भी प्रकार की धार्मिक गतिविधि से बचना चाहिए, ताकि सभी छात्रों के लिए समान वातावरण बना रहे।

फिलहाल बदायूं के इस स्कूल का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।

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