औरैया जिले में लोकप्रिय जिलाधिकारी की दरियादिली और संवेदनशील प्रशासनिक दृष्टिकोण ने एक बार फिर सबका दिल जीता है।

जिले में बढ़ती ठंड और कठिन परिस्थितियों के बीच जिलाधिकारी ने सीएमओ ऑफिस के पास लौह पीटने वाले ग्रामीणों के बीच कंबल वितरण कर उनकी भयंकर सर्दी में राहत सुनिश्चित की। यह केवल राहत देने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने ग्रामीणों की जीवन स्थितियों को स्थायी रूप से सुधारने के लिए पक्के आवास निर्माण का भी वादा किया।
जिलाधिकारी मंदिर से लौटते समय ग्रामीणों के बीच पहुंचे और कंबल वितरण की प्रक्रिया में व्यक्तिगत रूप से शामिल हुए। ग्रामीणों की झोपड़ियों का अवलोकन कर उन्होंने एक दर्जन पक्के आवास निर्माण का वादा किया, जो जल्द ही तैयार किए जाएंगे। ठंड में कंबल पाकर महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे सभी प्रसन्न दिखे। लोगों ने अपने सामने आए जिलाधिकारी को धन्यवाद देते हुए उनकी सराहना की।
यह पहल जिलाधिकारी की जनसेवा और संवेदनशील प्रशासनिक दृष्टि का प्रतीक है। उल्लेखनीय है कि यह जिलाधिकारी लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री के विकास बोर्ड में जिले को प्रथम स्थान दिलाने में सफल हुए हैं। उनकी अथक मेहनत और 18 घंटे की दिनचर्या ने औरैया जिले को प्रदेश के अग्रणी जिलों की सूची में शामिल किया है।
इस अवसर पर ग्राम प्रधान पति सुदेश राजपूत, लेखपाल जय प्रताप सिंह गौर, ग्राम सचिव अरविंद कुमार, और कानूनगो अखिलेश पांडेय सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहल ग्रामीणों के विश्वास और प्रशासन पर भरोसे को बढ़ाती है।
ग्रामीणों ने बताया कि इस कदम से न केवल उन्हें तत्काल राहत मिली है, बल्कि उन्हें भरोसा हुआ कि प्रशासन उनके जीवन स्तर और सुरक्षा के प्रति सक्रिय और संवेदनशील है। महिलाएं और बुजुर्ग विशेष रूप से खुश दिखाई दिए, जिन्होंने कहा कि ठंड में कंबल पाकर उन्हें राहत मिली और भविष्य में पक्के आवास के निर्माण की उम्मीद मिली है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जिलाधिकारी की यह पहल सिर्फ तत्काल राहत तक सीमित नहीं है। यह ग्रामीण विकास, सामाजिक न्याय और मानवता की दिशा में एक प्रेरक कदम है। इस तरह के नेतृत्व से जिले में सकारात्मक बदलाव, प्रशासनिक पारदर्शिता और जनभागीदारी को बल मिलता है।
जिलाधिकारी का यह कदम साबित करता है कि लोकप्रिय और सक्रिय प्रशासनिक नेतृत्व से जिले में विकास की गति बढ़ती है और जनता के जीवन में वास्तविक बदलाव लाया जा सकता है। ठंड और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने ग्रामीणों की भलाई को सर्वोपरि रखा। उनकी यह पहल जिले में मानवता, प्रशासनिक संवेदनशीलता और विकास की मिसाल बन गई है।
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