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awareness against child marriage-औरैया में प्रशासन की कार्रवाई, नाबालिग लड़का-लड़की की शादी रुकवाई

उत्तर प्रदेश के औरैया जनपद से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां प्रशासन की तत्परता और सख्ती के चलते एक बाल विवाह को समय रहते रोक दिया गया। यह मामला समाज में व्याप्त कुरीतियों पर प्रशासन के कड़े रुख को दर्शाता है।

औरैया के माँ मंगला काली मंदिर परिसर में उस समय हड़कंप मच गया जब नाबालिग लड़का और लड़की की शादी कराए जाने की सूचना प्रशासन तक पहुंची। सूचना मिलते ही सदर उपजिलाधिकारी अजय आनन्द वर्मा तत्काल मौके पर पहुंचे और बिना देरी किए विवाह समारोह को रुकवा दिया।

प्रशासनिक टीम द्वारा मौके पर की गई जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। लड़की संजना के पिता नंदराम द्वारा प्रस्तुत आधार कार्ड में उसकी उम्र मात्र 13 वर्ष दर्ज पाई गई। वहीं लड़के लक्ष्मण के पिता कुंवर पाल अपने बेटे की उम्र से संबंधित कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। मौके पर मौजूद अधिकारियों द्वारा अनुमानित रूप से लड़के की उम्र लगभग 15 वर्ष आंकी गई।

इन तथ्यों के आधार पर प्रशासन ने स्पष्ट रूप से इस विवाह को बाल विवाह की श्रेणी में रखते हुए अवैध घोषित कर दिया और तत्काल प्रभाव से शादी पर रोक लगा दी। मौके पर मौजूद परिजनों और ग्रामीणों को भी बाल विवाह के दुष्परिणामों और कानूनी प्रावधानों के बारे में जागरूक किया गया।

उपजिलाधिकारी अजय आनन्द वर्मा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट कहा कि:
“बाल विवाह एक दंडनीय अपराध है और इसे किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस प्रकार के मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

उन्होंने आगे जिला प्रोबेशन अधिकारी अशोक कुमार को निर्देश दिए कि संबंधित अभिभावकों के खिलाफ विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि जिले में इस तरह की घटनाओं की रोकथाम के लिए निगरानी और अधिक सख्त की जाएगी।

यह घटना न केवल प्रशासन की सक्रियता को दर्शाती है, बल्कि समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश भी देती है। बाल विवाह जैसी कुप्रथा आज भी कई क्षेत्रों में जड़ें जमाए हुए है, जो बच्चों के भविष्य, शिक्षा और स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डालती है।

सरकार और प्रशासन लगातार जागरूकता अभियान चला रहे हैं, लेकिन इस प्रकार की घटनाएं यह संकेत देती हैं कि अभी भी समाज में व्यापक स्तर पर जागरूकता की आवश्यकता है।

औरैया प्रशासन द्वारा समय रहते की गई यह कार्रवाई सराहनीय है, जिसने दो नाबालिगों का जीवन अंधकार में जाने से बचा लिया। यह घटना स्पष्ट करती है कि यदि प्रशासन सतर्क और समाज जागरूक हो, तो बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं पर प्रभावी तरीके से रोक लगाई जा सकती है।

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