रिपोर्ट — औरैया संवाददाता
जनपद औरैया से एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां सरकारी योजनाओं के तहत बच्चों और गर्भवती महिलाओं को मिलने वाली सुविधाओं में गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। मामला महतेपुर दौलतपुर गांव के आंगनवाड़ी केंद्र से जुड़ा है, जहां ग्रामीणों और शिकायतकर्ता ने केंद्र के संचालन और राशन वितरण को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोपों के सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है और ग्रामीण प्रशासन से निष्पक्ष जांच व सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
आंगनवाड़ी केंद्र के संचालन पर उठे सवाल
शिकायतकर्ता देवांशु शुक्ला ने संबंधित अधिकारियों को दी गई शिकायत में आरोप लगाया है कि गांव का आंगनवाड़ी केंद्र नियमित रूप से संचालित नहीं किया जाता। उनका कहना है कि केंद्र अक्सर बंद रहता है और लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता।
ग्रामीणों के अनुसार, आंगनवाड़ी केंद्र का उद्देश्य गांव के छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को पोषण एवं स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है, लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग दिखाई दे रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई दिनों तक केंद्र बंद रहता है, जिससे बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा और पोषण दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
राशन वितरण में गड़बड़ी के आरोप
शिकायत में सबसे गंभीर आरोप सरकारी राशन और पोषण सामग्री के वितरण को लेकर लगाए गए हैं। बताया गया है कि बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए आने वाला राशन जरूरतमंदों तक पहुंचने के बजाय कथित रूप से बेचा जा रहा है।
ग्रामीणों का दावा है कि:
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हॉट कुक योजना के तहत मिलने वाला भोजन नियमित रूप से नहीं बनाया जाता
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गेहूं और चावल का वितरण सही तरीके से नहीं हुआ
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बच्चों के पोषण आहार में भारी अनियमितता रही
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बच्चों को मिलने वाली पंजीरी का वितरण लगभग कभी नहीं किया गया
इन आरोपों ने सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पहले भी हुई शिकायत, फिर भी कार्रवाई नहीं
ग्रामीणों के अनुसार यह पहली बार नहीं है जब आंगनवाड़ी केंद्र की शिकायत सामने आई हो। इससे पहले भी मामले की शिकायत की गई थी, जिसके बाद जांच की बात कही गई थी।
हालांकि जांच के दौरान कथित रूप से रजिस्टर और लाभार्थियों की सूची उपलब्ध नहीं कराई जा सकी। इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि मामले को दबाने की कोशिश की गई और शिकायत वापस लेने के लिए दबाव भी बनाया गया।
ग्रामीणों में नाराजगी
गांव के कई लोगों ने बताया कि आंगनवाड़ी केंद्र से उन्हें कोई वास्तविक लाभ नहीं मिल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की योजनाएं कागजों तक सीमित होकर रह गई हैं।
एक ग्रामीण ने बताया,
“बच्चों के नाम पर राशन आता है लेकिन हमें कभी नहीं मिलता। केंद्र अधिकतर बंद रहता है।”
महिलाओं ने भी आरोप लगाया कि गर्भावस्था के दौरान मिलने वाली पोषण सामग्री और सलाह उन्हें नियमित रूप से नहीं दी जाती।
बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य पर असर
विशेषज्ञों के अनुसार आंगनवाड़ी केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास की आधारशिला होते हैं। यहां मिलने वाला पोषण आहार कुपोषण रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो इसका सीधा असर बच्चों के स्वास्थ्य, विकास और गर्भवती महिलाओं की सेहत पर पड़ सकता है। कुपोषण जैसी समस्याएं ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से ही चुनौती बनी हुई हैं, ऐसे में योजनाओं का सही क्रियान्वयन बेहद जरूरी है।
ICDS योजना पर उठे सवाल
यह मामला केंद्र और राज्य सरकार की महत्वपूर्ण योजना इंटीग्रेटेड चाइल्ड डेवलपमेंट सर्विसेज (ICDS) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। इस योजना का उद्देश्य है:
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बच्चों को पोषण आहार उपलब्ध कराना
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गर्भवती और धात्री महिलाओं की स्वास्थ्य देखभाल
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टीकाकरण और स्वास्थ्य जागरूकता
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प्रारंभिक शिक्षा और विकास
लेकिन यदि जमीनी स्तर पर अनियमितताएं हो रही हैं, तो योजना का उद्देश्य प्रभावित होना स्वाभाविक है।
ग्रामीणों और शिकायतकर्ता ने संबंधित विभाग और जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि:
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आंगनवाड़ी केंद्र की नियमित जांच हो
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राशन वितरण की जांच कराई जाए
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दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो
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लाभार्थियों की सूची सार्वजनिक की जाए
ग्रामीणों का मानना है कि पारदर्शिता लाने से ही ऐसी समस्याओं पर रोक लगाई जा सकती है।
शिकायतकर्ता ने बताया कि मामले से जुड़े दस्तावेज और साक्ष्य संबंधित अधिकारियों को सौंपे जाने की तैयारी की जा रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि प्रशासन मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द जांच शुरू करेगा।
फिलहाल पूरे मामले में प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है। यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह न केवल स्थानीय स्तर बल्कि सरकारी योजनाओं की निगरानी व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल होगा।
ग्रामीणों की निगाहें अब प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या बच्चों और महिलाओं के अधिकारों से जुड़े इस गंभीर मामले में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी या फिर मामला अन्य शिकायतों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
औरैया का यह मामला बताता है कि सरकारी योजनाओं की सफलता केवल घोषणाओं से नहीं बल्कि जमीनी स्तर पर ईमानदार क्रियान्वयन से तय होती है। आंगनवाड़ी जैसे केंद्र समाज के सबसे संवेदनशील वर्ग — बच्चों और माताओं — से जुड़े होते हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार न केवल कानूनन अपराध है बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की भी अनदेखी है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी और सख्ती से कदम उठाता है और क्या गांव के बच्चों व महिलाओं को उनका हक मिल पाता है या नहीं।
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