औरैय जिले के पुरानी कलेक्ट्रेट स्थित कांशीराम आवास कॉलोनी से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां सैकड़ों परिवार बिना बिजली बिल जमा किए या बिना वैध कनेक्शन के वर्षों से धड़ल्ले से बिजली का उपभोग कर रहे हैं, और बिजली विभाग पूरी तरह मूकदर्शक बना हुआ है।

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, कॉलोनी में कई लाभार्थी ऐसे हैं जिन्होंने कई वर्षों से एक भी बिजली बिल जमा नहीं किया, फिर भी उनके घरों में दिन-रात बिजली का इस्तेमाल बेरोकटोक जारी है। वहीं, कई ऐसे उपभोक्ता भी हैं जिनके कनेक्शन कागज़ों में काटे जा चुके हैं, लेकिन वे आज भी आराम से बिजली का उपभोग कर रहे हैं।
कांशीराम आवास कॉलोनी का यह मामला सिर्फ बिजली चोरी नहीं, बल्कि विभागीय मिलीभगत और अनदेखी का भी संकेत देता है। कॉलोनी में रहने वाले कई लोगों के पास कॉमर्शियल उपयोग के उपकरण — जैसे वॉशिंग मशीन, फ्रिज, इंडक्शन, रूम हीटर और वॉटर हीटर — खुलेआम चल रहे हैं।
इतना ही नहीं, इन उपकरणों से भारी मात्रा में बिजली खपत होने के बावजूद न तो विभाग ने मीटर जांच कराई, न किसी उपभोक्ता पर कार्रवाई की।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बिजली विभाग के अधिकारी जानबूझकर इन मामलों पर आंखें मूंदे हुए हैं, और कुछ लाइनमैन या कर्मचारियों की मिलीभगत से यह खेल लंबे समय से चल रहा है।
अनुमान के अनुसार, सिर्फ इस कॉलोनी में हर महीने लाखों रुपये का बिजली राजस्व नुकसान हो रहा है।
जहां एक ओर सरकार ऊर्जा बचाने और पारदर्शिता की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ विभाग की यह लापरवाही सरकारी खजाने को सीधा नुकसान पहुंचा रही है।
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, कई घरों में बिना मीटर के कनेक्शन चल रहे हैं, और जिनके मीटर हैं, उनमें से कई काटे जा चुके हैं लेकिन बिजली की सप्लाई चालू है।
यह स्थिति न सिर्फ कानूनी उल्लंघन है, बल्कि अन्य ईमानदार उपभोक्ताओं के साथ अन्याय भी है जो नियमित बिल जमा करते हैं।
कॉलोनी के आसपास के लोगों में बिजली विभाग की इस अनदेखी को लेकर गहरी नाराजगी है। उनका कहना है कि
“जब आम आदमी एक महीने का बिल देर से भरता है तो बिजली काट दी जाती है, लेकिन यहां सालों से बिल न देने वालों को खुली छूट मिली हुई है।”
ग्रामीणों ने इस मामले की जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका आरोप है कि विभाग के कुछ कर्मचारी इस गड़बड़ी में शामिल हैं, जिनकी मिलीभगत से यह सिस्टम चल रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि
आखिर बिजली विभाग के अधिकारी इन अवैध उपभोक्ताओं पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे?
क्या विभागीय स्तर पर यह बड़ी अनदेखी या मिलीभगत का मामला है?
और लाखों का बिजली बिल बकाया होने के बावजूद वसूली कब और कैसे होगी?
स्थानीय नागरिकों ने जिलाधिकारी और मुख्य अभियंता से मांग की है कि इस कॉलोनी की तत्काल सर्वे जांच कराई जाए और जो भी व्यक्ति बिना वैध कनेक्शन या मीटर के बिजली का उपयोग कर रहा है, उसके खिलाफ बिजली चोरी की एफआईआर दर्ज कराई जाए।
कॉलोनी के ही निवासी रमेश कुमार ने कहा —
“यहां दर्जनों घरों में बिना बिल के बिजली चल रही है। मीटर कटा हुआ है फिर भी पावर सप्लाई मिल रही है। अधिकारी जानते हैं पर कार्रवाई नहीं करते।”
वहीं, कुछ अन्य लोगों ने बताया कि विभागीय अधिकारी अक्सर सर्वे के नाम पर आते हैं, लेकिन लौटने के बाद कोई कदम नहीं उठाते।
कांशीराम आवास कॉलोनी में जारी यह स्थिति ऊर्जा विभाग की कार्यप्रणाली और जिम्मेदारी दोनों पर सवाल उठाती है।
एक ओर सरकार बिजली चोरी रोकने के लिए अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर विभागीय मिलीभगत से चल रही यह अवैध खपत सुशासन के दावों पर सवालिया निशान खड़ा करती है।
अब देखना होगा कि औरैया प्रशासन इस पर कब और कैसी कार्रवाई करता है।
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