जालौन जनपद के महेवा विकासखंड के ग्राम नूरपुर में सोमवार को ‘सुशासन सप्ताह एवं प्रशासन गांव की ओर’ अभियान के तहत जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय और पुलिस अधीक्षक डॉ. दुर्गेश कुमार ने गांव पहुंचकर जनसंवाद किया। यह दौरा केवल निरीक्षण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अधिकारी गांव की गलियों में खुद उतरे और ग्रामीणों से प्रत्यक्ष रूप से समस्याएं सुनीं।

सुशासन अब कागज़ों से निकलकर धरातल पर उतर रहा है — यही संदेश इस दौरे से साफ झलकता है। चौपाल के दौरान अधिकारियों ने बुजुर्गों, महिलाओं, किसानों, युवाओं और बच्चों से आत्मीय संवाद स्थापित किया। ग्रामीणों ने खुले मंच पर अपनी समस्याएं रखीं — जिनमें पानी की निकासी, सड़कों में कीचड़, नालियों की सफाई, जल संरक्षण और बिजली की अनियमित आपूर्ति प्रमुख थीं।
गांव की गलियों में उतरे अधिकारी, किया जमीनी निरीक्षण
चौपाल के बाद डीएम और एसपी दोनों अधिकारियों ने गांव की गलियों में पैदल भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने प्राथमिक विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्र, ग्राम पंचायत भवन, हैंडपंप और पुराने कुओं का निरीक्षण किया।
डीएम राजेश कुमार पाण्डेय ने ग्राम विकास अधिकारी और खंड विकास अधिकारी को निर्देश दिए कि:
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गांव की ड्रेनेज प्रणाली (जल निकासी व्यवस्था) के लिए तत्काल प्रस्ताव तैयार किया जाए,
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सड़क किनारे नालियों की सफाई और मरम्मत प्राथमिकता पर की जाए,
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और पुराने कुओं के संरक्षण एवं पुनर्जीवन की ठोस कार्ययोजना बनाई जाए।
उन्होंने कहा कि “जल संरक्षण और स्वच्छता सुशासन की बुनियाद हैं। जब गांव साफ होंगे और पानी का प्रबंधन बेहतर होगा, तभी विकास स्थायी रूप से टिक सकेगा।”
पुलिस अधीक्षक डॉ. दुर्गेश कुमार ने ग्रामीणों से कानून-व्यवस्था, साइबर अपराध, महिला सुरक्षा और सामुदायिक सहयोग पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि पुलिस केवल कानून लागू करने वाली संस्था नहीं, बल्कि जनता की सुरक्षा की साझीदार है।
उन्होंने ग्रामीणों को अपील की कि किसी भी समस्या, विवाद या अपराध की सूचना तत्काल थाने या पुलिस हेल्पलाइन को दें। उन्होंने ग्राम प्रहरी और चौकीदारों को भी सक्रिय रहने के निर्देश दिए।
“पुलिस हर समय जनता के साथ खड़ी है। हमारा मकसद डर पैदा करना नहीं, बल्कि सुरक्षा और भरोसे का वातावरण बनाना है।” — डॉ. दुर्गेश कुमार, एसपी जालौन
‘सुशासन सप्ताह’ के तहत जिला प्रशासन का यह कार्यक्रम सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनशीलता का सशक्त उदाहरण बनता जा रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि पहली बार उन्हें ऐसा लगा कि “सरकार उनके दरवाजे तक आई है।”
डीएम और एसपी की इस संयुक्त पहल ने यह संदेश दिया कि शासन की असली ताकत फाइलों में नहीं, बल्कि जनता के बीच जाकर उनकी बात सुनने और समाधान देने में है।
गांव के बुजुर्ग रामलाल यादव ने कहा —
“पहली बार देखा कि अधिकारी खुद हमारी गलियों में चलकर आए। कीचड़ और पानी की समस्या खुद देखकर गए हैं, अब उम्मीद है कि समाधान भी होगा।”
वहीं युवाओं ने प्रशासन की इस पहल को “भरोसे और पारदर्शिता की शुरुआत” बताया।
नूरपुर में शुरू हुई यह पहल अब अन्य ग्राम पंचायतों के लिए प्रेरणास्रोत बन सकती है। जालौन प्रशासन ने दिखाया है कि सुशासन का मतलब केवल योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं, बल्कि लोगों तक पहुंचना और उनकी समस्याओं को मौके पर सुलझाना है।
नूरपुर में डीएम और एसपी का यह दौरा अब “गांव की गलियों में सुशासन” की मिसाल बन गया है।
राजेश कुमार पाण्डेय, जिलाधिकारी जालौन
“हमारा उद्देश्य यही है कि शासन की योजनाएं हर नागरिक तक पहुंचें और उसकी समस्या का समाधान वहीं पर हो, जहां वह मौजूद है — यही असली सुशासन है।”
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