बांदा पुलिस ने फर्जी आदेश दिखाकर ट्रक छुड़ाने की साजिश नाकाम की, दो शातिर गिरफ्तार

बांदा: उत्तर प्रदेश के बांदा जनपद से एक बड़ी खबर सामने आई है। पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल के निर्देशन में थाना कोतवाली नगर पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए सीज ट्रक को फर्जी आदेशों के जरिए छुड़ाने की कोशिश कर रहे दो शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई पुलिस की त्वरित सतर्कता और सटीक जांच का नतीजा मानी जा रही है।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी एक सीज किए गए ट्रक को फर्जी या कूटरचित आदेशों के माध्यम से छुड़ाने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने आरटीओ (क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय) और वाणिज्य कर विभाग के नाम से अवमुक्ति आदेश तैयार किए थे, जिन्हें देखकर यह प्रतीत होता था कि ट्रक को विभागीय आदेश के तहत छोड़ने की अनुमति मिल गई है।
हालांकि, जब दस्तावेज़ पुलिस के सामने प्रस्तुत किए गए तो अधिकारियों को आदेशों की भाषा और मुहरों पर संदेह हुआ। तुरंत उच्चाधिकारियों के निर्देश पर आदेशों का सत्यापन कराया गया।
जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि आरटीओ और वाणिज्य कर विभाग द्वारा ऐसे किसी भी अवमुक्ति आदेश को जारी नहीं किया गया था। यानी, आरोपियों ने सरकारी दस्तावेजों की जालसाजी कर ट्रक को छुड़ाने की साजिश रची थी।
पुलिस टीम ने तत्परता दिखाते हुए गल्ला मंडी क्षेत्र में छापा मारा, जहां आरोपी ट्रक के पास मौजूद थे। मौके पर ही दोनों को दबोच लिया गया।
गिरफ्तार किए गए दोनों अभियुक्तों से पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियाँ सामने आई हैं। पुलिस ने उनके पास से निम्नलिखित सामान बरामद किया:
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फर्जी अवमुक्ति आदेश प्रपत्र
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एक स्विफ्ट कार
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₹15,000 नकद राशि
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03 मोबाइल फोन
पुलिस का कहना है कि आरोपी इस पूरे जालसाज नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं, जो सीज वाहनों को फर्जी आदेशों से छुड़ाने का धंधा करते हैं।
कोतवाली नगर पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ धारा 318(4)/338/336(3)/340(2) बीएनएस के तहत मुकदमा पंजीकृत किया है। पुलिस इनसे पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि इनके पीछे और कौन लोग शामिल हैं तथा ऐसे कितने और वाहन फर्जी तरीके से छोड़े गए हैं।
इस पूरी कार्रवाई में पुलिस की सतर्कता की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समय रहते आदेशों का सत्यापन कराया गया, जिससे यह फर्जीवाड़ा बेनकाब हो गया। यदि यह आदेश बिना जांच के स्वीकार कर लिए जाते, तो आरोपी ट्रक को आसानी से छुड़ाने में सफल हो जाते और सरकारी तंत्र को भारी नुकसान होता।
पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने टीम की सराहना करते हुए कहा कि —
“बांदा पुलिस किसी भी प्रकार के फर्जीवाड़े या सरकारी दस्तावेजों की जालसाजी को बर्दाश्त नहीं करेगी। ऐसी गतिविधियों में लिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
सहायक पुलिस अधीक्षक (एएसपी) मेविश टॉक ने बताया कि गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी संगठित तरीके से फर्जी दस्तावेज़ तैयार कर सरकारी अधिकारियों को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे थे।
“हम इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रहे हैं। जो भी व्यक्ति या संस्था इसमें शामिल होगी, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
घटना के बाद स्थानीय लोगों में पुलिस की तत्पर कार्रवाई की प्रशंसा की जा रही है। लोगों का कहना है कि इस तरह की सख्ती से प्रशासन की साख बढ़ती है और अपराधियों के हौसले पस्त होते हैं।
बांदा पुलिस ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यदि जांच और सतर्कता में ईमानदारी बरती जाए तो बड़े से बड़ा फर्जीवाड़ा भी पकड़ा जा सकता है। पुलिस ने न केवल दो शातिरों को गिरफ्तार किया, बल्कि सरकारी दस्तावेजों की जालसाजी करने वाले एक संगठित गिरोह का भी पर्दाफाश किया है।
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