बिल्हौर में उप-निबंधक कार्यालय स्थानांतरण के विरोध में अधिवक्ताओं का आंदोलन छठे दिन भी जारी

कानपुर नगर। बिल्हौर तहसील में उप-निबंधक कार्यालय (Sub-Registrar Office) के प्रस्तावित स्थानांतरण को लेकर अधिवक्ताओं का विरोध प्रदर्शन लगातार छठे दिन भी जारी रहा। बुधवार को अधिवक्ताओं ने अपने संगठनात्मक बैनर तले एकजुट होकर तहसील परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। रजिस्ट्रार कार्यालय के बाहर धरना देकर वकीलों ने नारेबाजी की और स्थानांतरण प्रस्ताव को जल्द वापस लेने की मांग की।
धरना के दौरान अधिवक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि यह प्रस्ताव न केवल अधिवक्ताओं के हितों के खिलाफ है, बल्कि आम जनता को भी असुविधा में डाल देगा। आंदोलन के चलते तहसील परिसर में स्थित उप-निबंधन कार्यालय, न्यायिक और प्रशासनिक शाखाओं में कार्य पूरी तरह ठप रहा। लगातार चल रही कलमबंद हड़ताल के कारण आमजन को अपने जरूरी दस्तावेजों के कार्यों में भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अधिवक्ताओं ने बताया कि वर्तमान में तहसील परिसर में ही ग्राम न्यायालय, उपजिलाधिकारी न्यायालय, तहसीलदार न्यायालय और कोतवाली जैसी सभी प्रशासनिक और न्यायिक सुविधाएं पहले से मौजूद हैं। ऐसे में उप-निबंधन कार्यालय को यहां से लगभग दो किलोमीटर दूर स्थानांतरित करने का कोई तर्कसंगत कारण नहीं दिखता।
लायर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रवीण कटियार ने कहा कि उप-निबंधन कार्यालय के लिए चुनी गई भूमि जंगल क्षेत्र में स्थित है, जहां तक आम लोगों की पहुंच कठिन है। ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के क्रय-विक्रय के दौरान प्रायः नगद लेन-देन होता है, ऐसे में कार्यालय का सुनसान क्षेत्र में होना आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकता है।
महामंत्री राजीव कटियार ने कहा कि कार्यालय को सुनसान इलाके में ले जाने से अपराधियों को सक्रिय होने का मौका मिलेगा। इससे ग्रामीण इलाकों में आपराधिक घटनाओं की आशंका बढ़ जाएगी और जनता असुरक्षित महसूस करेगी।
सूत्रों के अनुसार, उप-निबंधन कार्यालय स्थानांतरण के लिए प्रशासन ने उत्तरीपुरा, मकान पूर्वा और सुभानपुर मुरादनगर गांवों की भूमि का निरीक्षण किया था, जिनमें अंततः सुभानपुर मुरादनगर की भूमि को चयनित किया गया। अधिवक्ताओं ने इसी निर्णय का तीव्र विरोध किया है। उनका कहना है कि चयनित भूमि न केवल दूरस्थ है, बल्कि वहां मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं।
अधिवक्ताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने स्थानांतरण के निर्णय को शीघ्र वापस नहीं लिया, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह केवल वकीलों का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की जनता के हितों का सवाल है। अधिवक्ताओं ने जनहित में इस निर्णय को रद्द करने की मांग की और चेताया कि विरोध की लहर पूरे जिले में फैल सकती है।
धरना स्थल पर बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे। प्रदर्शन के दौरान वकीलों ने न्याय और सुरक्षा के मुद्दे पर प्रशासन से संवाद की मांग की। फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर इस मामले में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन बढ़ते विरोध के मद्देनज़र मामले को गंभीरता से देखा जा रहा है।
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