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जानें कब है पौष पूर्णिमा…

कल शुक्रवार को पौष पूर्णिमा सवार्थसिद्धि योग में मनाई जाएगी। इसके साथ ही तीर्थराज प्रयाग में गंगा, यमुना एवं अदृश्य सरस्वती के संगम पर हर साल लगने वाला दुनिया के सबसे बड़े माघ मेला में पौष पूर्णिमा के स्नान पर्व के साथ छह जनवरी से शुरू हो रहा है।  मेले के दौरान पौष पूर्णिमा, मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या, माघ पूर्णिमा के साथ 18 फरवरी को महाशिवरात्रि पर्व तक कुल पांच स्नान पर्व होंगे। मेले में कल्पवास करने और आस्था की डुबकी लगाने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या है।
गंगा किनारे संगम तट पर कल्पवास की प्रथा सदियो पुरानी है। करीब 43 दिन के लिए लोग यहां आकर रहते हैं, भजन कीर्तन करते हैं और तीन बार गंगा स्नान करते हैं।  एक माह तक चलने वाले कल्पवास के दौरान कल्पवासी को जमीन पर सोना पड़ता है।  इस दौरान एक समय का आहार या निराहार भी रह सकते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, माघ मास में सभी तीर्थों को अपने राजा से मिलने प्रयागराज आता पड़ता है। गंगा-यमुना और सरस्वती के पावन संगम में सभी तीर्थ और जुड़े देवता स्नान करके धन्य हो जाते हैं। कहते हैं कि कल्पवास के दौरान स्नान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

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