
देशभर में विजयादशमी का पर्व हर्षोल्लास और धार्मिक श्रद्धा के साथ मनाया गया। मंगलवार, 20 अक्टूबर को देश के अधिकांश हिस्सों में दशहरे के अवसर पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया गया। दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश, बिहार और अन्य राज्यों तक रामलीलाओं, पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में आयोजित विजयादशमी समारोह में हिस्सा लिया और देशवासियों को संबोधित करते हुए सत्य, मानवता, राष्ट्रीय एकता और भगवान राम के आदर्शों का संदेश दिया। कुछ क्षेत्रों में स्थानीय धार्मिक परंपराओं और पंचांग के अनुसार 21 अक्टूबर को भी विजयादशमी से जुड़े आयोजन हुए।
पीएम मोदी ने देशवासियों को दिया एकजुटता का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन स्थित डीडीए उत्सव ग्राउंड में श्री रामलीला समिति इंद्रप्रस्थ की ओर से आयोजित विजयादशमी समारोह में भाग लिया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि विजयादशमी केवल त्योहार नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है।
पीएम मोदी ने कहा कि जब लोग सत्य और मानवता के साथ खड़े होते हैं, तो अंततः जीत उन्हीं की होती है। उन्होंने देशवासियों से समाज को बांटने वाली शक्तियों से सावधान रहने और राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखने की अपील की। प्रधानमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों और राष्ट्रीय संस्थाओं से देशहित में एकजुट होकर काम करने का आह्वान भी किया। प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, उनके भाषण का मुख्य संदेश सत्य, सद्भाव और राष्ट्रीय एकता पर केंद्रित रहा।
रामराज्य के आदर्शों का किया जिक्र
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में भगवान श्रीराम के जीवन और उनके आदर्शों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भगवान राम ने कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और मर्यादा का मार्ग नहीं छोड़ा। वनवास के दौरान निषादराज को गले लगाने और माता शबरी का सम्मान करने के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए उन्होंने करुणा, प्रेम, समानता और सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया।
पीएम मोदी ने रामराज्य की अवधारणा को ऐसे शासन के रूप में प्रस्तुत किया, जहां किसी के साथ भेदभाव न हो, सभी को न्याय मिले और हर व्यक्ति को समान अवसर प्राप्त हों। उन्होंने गरीबों और वंचितों की सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात भी कही। उनके मुताबिक, शासन का उद्देश्य केवल सत्ता चलाना नहीं, बल्कि जनता के कल्याण के लिए काम करना होना चाहिए।
दिल्ली में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति भी हुए शामिल
राजधानी दिल्ली में दशहरे के अवसर पर कई बड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने द्वारका सेक्टर-10 में आयोजित रामलीला समारोह में हिस्सा लिया और रावण दहन किया। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी इस कार्यक्रम में मौजूद रहीं।
वहीं, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने ऐतिहासिक लव कुश रामलीला में भाग लिया। यहां 110 फुट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया। इन आयोजनों में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और सुरक्षा व्यवस्था के बीच पारंपरिक उत्सव मनाया गया। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, देश के कई प्रमुख नेताओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में आयोजित दशहरा कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।
यूपी और बिहार में भी रावण दहन
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में विजयादशमी कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण का राजतिलक कर पूजा-अर्चना की। बिहार की राजधानी पटना के गांधी मैदान में भी भव्य रावण दहन समारोह आयोजित हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शामिल हुए।
दशहरे के इन कार्यक्रमों में लोगों ने परिवार और दोस्तों के साथ भाग लिया। बच्चों और युवाओं में पुतला दहन को लेकर खास उत्साह दिखा। कई स्थानों पर रामलीला के अंतिम दृश्यों के बाद आतिशबाजी और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुईं।

बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश
विजयादशमी का धार्मिक महत्व भगवान राम की रावण पर विजय और देवी दुर्गा की महिषासुर पर जीत से जुड़ा है। यह पर्व लोगों को अहंकार, अन्याय और नकारात्मकता से दूर रहकर सत्य और धर्म का मार्ग अपनाने की प्रेरणा देता है।
इस वर्ष भी देशभर में दशहरे के आयोजनों के माध्यम से यही संदेश दिया गया कि सामाजिक सद्भाव, आपसी सम्मान और एकता से ही समाज मजबूत बनता है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन के अंत में ‘राम से राष्ट्र’ और ‘देव से देश’ की परिकल्पना को साकार करने का संकल्प दोहराया।
देशभर में हुए इन आयोजनों के साथ विजयादशमी का पर्व धार्मिक उत्साह और सांस्कृतिक परंपराओं के बीच संपन्न हुआ।




