
दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास की रिहाई का इंतजार सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को भी जारी रहा। रविवार को दोनों की रिहाई से जुड़ी सुनवाई के लिए पार्टी के समर्थकों और कानूनी टीम को करीब पांच घंटे इंतजार करना पड़ा, लेकिन कार्यवाही महज 8 से 10 मिनट में समाप्त हो गई। विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने धमकी मिलने और मानसिक प्रताड़ना का हवाला दिया, जिसके बाद मामले में कोई अंतिम आदेश नहीं हो सका। दोनों नेता छठे दिन भी हिरासत में रहे। <Cite refs=
पांच घंटे इंतजार के बाद भी क्यों नहीं हुई रिहाई?
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को सुनवाई के लिए विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट महेश कुमार मीना के मंडी मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचने के बाद भी कार्यवाही शुरू होने में देरी हुई। CJP के प्रतिनिधियों का कहना है कि मजिस्ट्रेट दोपहर करीब 1:30 से 2 बजे के बीच पहुंच गए थे, लेकिन सुनवाई शाम लगभग 5 बजे शुरू हुई।
पार्टी की कानूनी टीम को उम्मीद थी कि जमानतदारों के दस्तावेज और जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद दोनों नेताओं को रिहा कर दिया जाएगा। हालांकि, सुनवाई के दौरान मजिस्ट्रेट ने धमकी मिलने की बात कही और मामले को आगे बढ़ाने से पहले जांच की जरूरत बताई। परिणामस्वरूप रिहाई पर फैसला नहीं हो सका।
13 अक्टूबर को जंतर-मंतर से हिरासत में लिए गए थे नेता
आशुतोष रांका और सौरव दास को 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। आरोप है कि दोनों अन्य कार्यकर्ताओं के साथ उस स्थान पर पहुंचे, जिसे प्रशासन ने आधिकारिक प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया था। वहां उन्होंने तिरंगा फहराने की कोशिश की और पुलिस ने कार्रवाई की।
14 अक्टूबर को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। आदेश में कहा गया कि उन्होंने 11 अक्टूबर को शांति बनाए रखने के लिए हस्ताक्षरित बॉन्ड का उल्लंघन किया था और उस समय पर्याप्त जमानतदार उपलब्ध नहीं थे। दोनों को तिहाड़ जेल भेज दिया गया।
CJP का आरोप—जानबूझकर अटकाई जा रही रिहाई
CJP के नेताओं ने आरोप लगाया है कि पुलिस और प्रशासन की ओर से बार-बार नई आपत्तियां उठाए जाने के कारण रिहाई की प्रक्रिया लंबी खिंच रही है। पार्टी की कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह के मुताबिक, 15 अक्टूबर से कई बार जमानत संबंधी दस्तावेज जमा किए गए, लेकिन अलग-अलग कारणों से उन्हें स्वीकार नहीं किया गया।
पार्टी की राष्ट्रीय सचिव आफरीन नवाज ने भी दावा किया कि कभी सावधि जमा से जुड़े दस्तावेजों पर, तो कभी जमानतदारों के दिल्ली के पते को लेकर आपत्ति जताई गई। CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि प्रशासन रिहाई में जानबूझकर देरी कर रहा है। हालांकि, ये पार्टी की ओर से लगाए गए आरोप हैं।
पुलिस ने आरोपों को किया खारिज
दिल्ली पुलिस ने रिहाई में जानबूझकर देरी करने के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रस्तुत किए गए जमानत बॉन्ड में खामियां थीं, इसलिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना जरूरी था।
सुनवाई के दौरान पुलिस ने यह आशंका भी जताई कि अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरव दास फिर से प्रदर्शन की योजना बना सकते हैं। CJP के एक प्रवक्ता ने इसका खंडन करते हुए कहा कि फिलहाल ऐसा कोई प्रदर्शन प्रस्तावित नहीं था।
मजिस्ट्रेट को धमकी मिलने पर FIR दर्ज
पुलिस के मुताबिक, विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट महेश कुमार मीना ने रविवार शाम धमकी भरे संदेश मिलने की शिकायत की थी। इसके बाद नई दिल्ली जिले में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक धमकी से संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई।
मजिस्ट्रेट ने अपनी सुरक्षा और मानसिक प्रताड़ना का हवाला दिया। इस घटनाक्रम ने मामले की सुनवाई को और जटिल बना दिया है। फिलहाल दोनों नेताओं की रिहाई पर अंतिम आदेश नहीं हुआ है और आगे की कानूनी प्रक्रिया का इंतजार है।

अब आगे क्या होगा?
आशुतोष रांका और सौरव दास की रिहाई का मामला अब जमानतदारों के दस्तावेजों की स्वीकार्यता, पुलिस की आपत्तियों और मजिस्ट्रेट की शिकायत से जुड़ी जांच के बीच अटका हुआ है। CJP का कहना है कि वह कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है, जबकि पुलिस अपनी प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप बता रही है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि दोनों नेताओं की रिहाई पर सुनवाई कब पूरी होगी। जब तक सक्षम अधिकारी का आदेश नहीं आता, उनकी रिहाई की स्थिति स्पष्ट नहीं मानी जा सकती।




