
बेंगलुरु: देश में बेरोजगारी की समस्या और सरकारी नौकरियों के लिए युवाओं के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच केंद्रीय मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने एक अहम सुझाव दिया है। उन्होंने सरकारी कर्मचारियों की सेवा अवधि मौजूदा लगभग 35 साल से घटाकर 10, 15 या 20 साल करने का विचार सामने रखा। उनका मानना है कि यदि इस तरह की व्यवस्था पर गंभीरता से विचार किया जाए, तो अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी पाने का अवसर मिल सकता है। उन्होंने हर परिवार में कम से कम एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी उपलब्ध कराने का लक्ष्य भी सामने रखा। हालांकि, यह फिलहाल एक प्रस्ताव है, कोई घोषित सरकारी नीति नहीं।
हर परिवार में एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी देने का विचार
केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने यह सुझाव कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) की भर्ती प्रक्रिया में सुधार को लेकर आयोजित एक खुली चर्चा के दौरान दिया। इस बातचीत में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों ने भी हिस्सा लिया और भर्ती व्यवस्था से जुड़ी अपनी समस्याएं सामने रखीं।
कुमारस्वामी ने कहा कि आम तौर पर सरकारी कर्मचारी लगभग 35 साल तक सेवा में रहते हैं। ऐसे में सेवा अवधि को घटाकर 10, 15 या 20 साल करने के विकल्प पर विचार किया जा सकता है। इससे रिक्त पदों पर नए उम्मीदवारों की नियुक्ति की संभावनाएं बढ़ सकती हैं और रोजगार के अवसरों का दायरा विस्तृत हो सकता है।
उनके विचार के मुताबिक, यदि हर परिवार में कम से कम एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी देने का लक्ष्य निर्धारित किया जाए, तो बेरोजगारी की समस्या से निपटने के लिए एक अलग दृष्टिकोण विकसित किया जा सकता है। हालांकि, इस मॉडल को लागू करने से पहले वित्तीय संसाधनों, कर्मचारियों की जरूरतों और प्रशासनिक व्यवस्था जैसे पहलुओं पर विचार करना होगा।
पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ पर भी चर्चा
कुमारस्वामी ने प्रस्तावित व्यवस्था के तहत सेवा अवधि पूरी करने वाले कर्मचारियों को पेंशन और सेवानिवृत्ति से जुड़े दूसरे लाभ देने की संभावना का भी उल्लेख किया। हालांकि, इन लाभों की पात्रता और भुगतान की व्यवस्था को लेकर कोई विस्तृत नीति सामने नहीं आई है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल वह इस विचार को सार्वजनिक चर्चा के लिए रख रहे हैं। यदि भविष्य में उन्हें इस दिशा में काम करने का अवसर मिलता है, तो वह इसकी व्यवहारिकता और इसे लागू करने की संभावनाओं पर विचार करेंगे।
मंत्री ने बढ़ती बेरोजगारी पर चिंता जताते हुए कहा कि समस्या का समाधान खोजने के लिए पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़ना जरूरी है। उनके इस सुझाव से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के बीच रोजगार नीति और भर्ती व्यवस्था को लेकर नई चर्चा शुरू हो सकती है।
KPSC की भर्ती प्रक्रिया पर भ्रष्टाचार के आरोप
कार्यक्रम के दौरान कुमारस्वामी ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग के कामकाज पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग में भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर चिंताजनक स्थिति है। उन्होंने सहायक कार्यकारी अभियंताओं की भर्ती, पशुपालन विभाग में नियुक्तियों और कर्नाटक प्रशासनिक सेवा की भर्ती से जुड़े कथित विवादों का उल्लेख किया।
मंत्री ने इन मामलों में पैसे के लेन-देन, पक्षपात और जाति के आधार पर फैसले किए जाने के आरोप लगाए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित मामलों की कानूनी स्थिति का अलग से सत्यापन जरूरी है।
अभ्यर्थियों ने भी आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि भर्ती परीक्षाओं में गलतियां, परीक्षा कार्यक्रम में बदलाव और परिणामों को लेकर अनिश्चितता उनकी तैयारी को प्रभावित करती है। कुछ उम्मीदवारों ने ओएमआर शीट में कथित गड़बड़ी की शिकायत भी की।
अभ्यर्थियों ने बताईं अपनी परेशानियां
चर्चा में शामिल उत्तर कर्नाटक के एक अभ्यर्थी ने बताया कि सरकारी नौकरी की तैयारी के लिए बेंगलुरु जैसे शहर में रहना आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण है। विद्यार्थियों को किराया, भोजन और पढ़ाई का खर्च उठाना पड़ता है। इसके बावजूद भर्ती परीक्षाओं की तारीखों और अधिसूचनाओं को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है।
अन्य उम्मीदवारों ने कहा कि भर्ती की पात्रता शर्तों में बदलाव, वेबसाइट पर नए दस्तावेज अपलोड होने और मामलों के अदालत तक पहुंचने से उनकी मेहनत पर असर पड़ता है। उनका कहना था कि परीक्षा पास करने के बाद भी नियुक्ति पत्र मिलने की समयसीमा स्पष्ट नहीं होती।
अभ्यर्थियों ने यह सवाल भी उठाया कि भर्ती की जिम्मेदारी कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (KEA) को सौंपने से पहले मौजूदा व्यवस्था की कमियों को दूर करना जरूरी है। उनके मुताबिक, केवल जिम्मेदारी बदलने से पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होगी।
भर्ती आयोग में सुधार और बड़े आंदोलन की अपील
अभ्यर्थियों ने KPSC के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के लिए निष्पक्ष तथा विशेषज्ञ समिति गठित करने का सुझाव दिया। उन्होंने मांग की कि भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई हो और परीक्षा से संबंधित जानकारी उम्मीदवारों को समय पर उपलब्ध कराई जाए।
कुमारस्वामी ने अभ्यर्थियों की समस्याएं सुनने के बाद कहा कि आयोग में सुधार के लिए व्यापक प्रयास करने होंगे। उन्होंने युवाओं से इस मुद्दे पर एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की और भरोसा दिलाया कि वह उनकी मांगों के समर्थन में खड़े रहेंगे।
क्या बदल सकती है सरकारी नौकरी की व्यवस्था?
कुमारस्वामी का सुझाव ऐसे समय सामने आया है, जब सरकारी नौकरियों के लिए बड़ी संख्या में युवा परीक्षाओं की तैयारी करते हैं और कई भर्तियों में लंबी चयन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठते रहे हैं। सेवा अवधि कम करने से अधिक लोगों को अवसर देने की संभावना पर चर्चा हो सकती है, लेकिन इसके साथ पेंशन का खर्च, अनुभवी कर्मचारियों की उपलब्धता, प्रशासनिक निरंतरता और नए पदों की वास्तविक जरूरत जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण होंगे।

फिलहाल सेवा अवधि घटाने या हर परिवार को सरकारी नौकरी देने की कोई आधिकारिक योजना घोषित नहीं की गई है। ऐसे में इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए विस्तृत अध्ययन, वित्तीय आकलन और नीतिगत निर्णय आवश्यक होंगे। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रोजगार बढ़ाने और भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए इस सुझाव पर आगे कोई ठोस पहल होती है या नहीं।




