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Remote Sensing : चीन के छिंगताओ में पहला एशिया प्रशांत भू विज्ञान एवं सुदूर संवेदन सम्मेलन शुरू

चीन के छिंगताओ में पहले एशिया-प्रशांत भू-विज्ञान एवं सुदूर संवेदन सम्मेलन का आगाज, 20 देशों के विशेषज्ञ हुए शामिल

छिंगताओ। चीन के शानतोंग प्रांत के छिंगताओ शहर में पहले एशिया-प्रशांत भू-विज्ञान एवं सुदूर संवेदन सम्मेलन का उद्घाटन हुआ। तीन दिनों तक चलने वाले इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का मुख्य विषय ‘सतत स्वच्छ पृथ्वी विकास के लिए सुदूर संवेदन अनुप्रयोग’ रखा गया है। सम्मेलन में 20 देशों और क्षेत्रों के 230 से अधिक विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों तथा संबंधित उद्यमों के विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और विद्वानों समेत 1,000 से अधिक प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। इस आयोजन का उद्देश्य भू-विज्ञान और सुदूर संवेदन के क्षेत्र में नवीनतम वैज्ञानिक प्रगति को साझा करना तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध और तकनीकी सहयोग को मजबूत करना है।

पृथ्वी और पर्यावरण की निगरानी में नई तकनीकों पर जोर

सम्मेलन में भू-विज्ञान और सुदूर संवेदन के क्षेत्र में विकसित हो रही आधुनिक तकनीकों तथा उनके व्यावहारिक उपयोगों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसमें बहु-स्रोत सुदूर संवेदन अवलोकन, उन्नत संवेदन प्रौद्योगिकी, डेटा विश्लेषण की आधुनिक विधियों और सतत विकास से जुड़े अनुप्रयोगों पर चर्चा की जा रही है।

सुदूर संवेदन तकनीक के माध्यम से पृथ्वी की सतह, समुद्र, वायुमंडल, वनस्पति और पर्यावरण में होने वाले बदलावों का अध्ययन किया जाता है। उपग्रहों और अन्य आधुनिक उपकरणों से प्राप्त आंकड़ों की मदद से वैज्ञानिक प्राकृतिक संसाधनों की स्थिति का आकलन करने, पर्यावरणीय बदलावों को समझने और आपदाओं से संबंधित परिस्थितियों की निगरानी करने में सक्षम होते हैं।

ऐसे में सम्मेलन को वैज्ञानिकों के लिए अपने शोध निष्कर्ष साझा करने और पृथ्वी से जुड़ी विभिन्न चुनौतियों के समाधान तलाशने का महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।

जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन में उपयोगी होगी तकनीक

सम्मेलन का एक प्रमुख उद्देश्य सुदूर संवेदन तकनीक के जरिए पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देना है। इसके तहत प्राकृतिक संसाधनों की निगरानी, समुद्री और वायुमंडलीय अवलोकन, आपदा प्रबंधन तथा जलवायु परिवर्तन से निपटने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।

सुदूर संवेदन से प्राप्त आंकड़े बाढ़, सूखा और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति समझने में मदद कर सकते हैं। इसके अलावा, इन तकनीकों का इस्तेमाल भूमि उपयोग में बदलाव, पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिति और पर्यावरणीय समस्याओं के आकलन के लिए भी किया जाता है।

सम्मेलन में इन क्षेत्रों में नई तकनीकों के विकास और उनके प्रभावी इस्तेमाल को लेकर अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

विशेषज्ञों ने साझा की नवीनतम शोध प्रगति

कार्यक्रम में चीनी विज्ञान अकादमी के अकादमीशियन कुओ हुआतोंग समेत कई विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने सुदूर संवेदन विज्ञान के अग्रणी क्षेत्रों में हो रहे अनुसंधान और भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।

इस दौरान डिजिटल पृथ्वी, शहरी एवं पर्यावरणीय सुदूर संवेदन, माइक्रोवेव सुदूर संवेदन, पृथ्वी अवलोकन प्रणाली और स्थानिक सूचना अनुप्रयोग जैसे विषयों पर नवीनतम शोध प्रगति तथा विकास की प्रमुख प्रवृत्तियों को साझा किया गया।

इन विषयों का संबंध पृथ्वी से जुड़े आंकड़ों के संग्रह, विश्लेषण और उपयोग से है। इनके माध्यम से शहरी क्षेत्रों में बदलावों का अध्ययन करने, पर्यावरणीय स्थितियों का आकलन करने और पृथ्वी अवलोकन से संबंधित वैज्ञानिक प्रणालियों को अधिक प्रभावी बनाने की संभावनाओं पर काम किया जा सकता है।

16 समानांतर सत्रों में होगी विस्तृत चर्चा

तीन दिवसीय सम्मेलन के दौरान 16 समानांतर सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें सुदूर संवेदन के विभिन्न वैज्ञानिक और तकनीकी पहलुओं पर केंद्रित चर्चाएं होंगी।

इन सत्रों में सुदूर संवेदन के बड़े मॉडल और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), समुद्री सुदूर संवेदन, वायुमंडलीय एवं जल विज्ञान सुदूर संवेदन, भूमि सतह और पारिस्थितिक पर्यावरण की निगरानी जैसे विषय शामिल हैं।

इसके अलावा, आपदा निगरानी, क्रायोस्फीयर एवं ध्रुवीय सुदूर संवेदन, शहरी सुदूर संवेदन, सुदूर संवेदन बिग डेटा, क्लाउड कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म और सतत विकास लक्ष्यों से जुड़े अनुप्रयोगों पर भी चर्चा की जाएगी।

इन सत्रों के जरिए शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों को अपने अनुभव साझा करने, नई शोध दिशाओं की पहचान करने और विभिन्न क्षेत्रों में सुदूर संवेदन तकनीक की उपयोगिता पर विचार करने का अवसर मिलेगा।

अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग को मिलेगा बढ़ावा

एशिया-प्रशांत भू-विज्ञान एवं सुदूर संवेदन सम्मेलन का आयोजन हर वर्ष करने की योजना है। इसका व्यापक उद्देश्य एशिया-प्रशांत क्षेत्र के साथ-साथ दुनिया भर में भू-विज्ञान और सुदूर संवेदन के क्षेत्र में काम करने वाले शोधकर्ताओं तथा संस्थानों को एक साझा मंच पर लाना है।

इस पहल के माध्यम से पृथ्वी अवलोकन, सुदूर संवेदन तकनीक और उसके विभिन्न अनुप्रयोगों में दीर्घकालिक शैक्षणिक आदान-प्रदान तथा सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।

छिंगताओ में आयोजित पहला सम्मेलन वैज्ञानिक समुदाय के बीच संवाद मजबूत करने और पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन तथा सतत विकास से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए नई संभावनाएं तलाशने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

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