
यमन में जारी संघर्ष के बीच हूती विद्रोहियों ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम मयून द्वीप पर कब्जा कर लिया है। यह द्वीप बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के बीच स्थित है, जिसे वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण जलमार्गों में गिना जाता है। ऐसे में मयून पर हूती नियंत्रण ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है।
यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी के मुताबिक, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने मयून द्वीप पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है। इस द्वीप को पेरिम आइलैंड के नाम से भी जाना जाता है। बताया गया है कि यमन की सरकारी सेना गुरुवार को इस द्वीप से पीछे हट गई थी। इसके बाद हूती लड़ाकों ने यहां अपनी मौजूदगी मजबूत कर ली।
एक हूती अधिकारी ने भी द्वीप पर विद्रोहियों की मौजूदगी की पुष्टि की है। मयून द्वीप यमन के पश्चिमी तट से करीब साढ़े तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसकी भौगोलिक स्थिति इसे बाब अल-मंदेब स्ट्रेट की निगरानी के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण बनाती है।
बाब अल-मंदेब क्यों है इतना अहम?
बाब अल-मंदेब स्ट्रेट लाल सागर को अरब सागर और हिंद महासागर की समुद्री व्यवस्था से जोड़ने वाला बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। दुनिया के करीब 12 फीसदी व्यापार का आवागमन इस समुद्री रास्ते से होता है। इसके अलावा वैश्विक कंटेनर ट्रैफिक का एक बड़ा हिस्सा भी इसी मार्ग से गुजरता है।
यही वजह है कि मयून द्वीप पर हूती कब्जे को केवल यमन के आंतरिक संघर्ष से जोड़कर नहीं देखा जा रहा है। अगर यहां से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों पर हमला या उन्हें रोकने का खतरा बढ़ता है, तो इसका सीधा असर एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच होने वाले समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट के बाद बढ़ी चिंता
मौजूदा क्षेत्रीय तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर पहले से ही अंतरराष्ट्रीय चिंता बनी हुई है। ऐसे हालात में बाब अल-मंदेब को वैकल्पिक समुद्री मार्ग के तौर पर देखा जा रहा था। लेकिन मयून द्वीप पर हूती नियंत्रण की खबर ने इस विकल्प को भी असुरक्षित बना दिया है।
हूती विद्रोहियों का कहना है कि उनकी गतिविधियां सऊदी अरब से जुड़े जहाजों को निशाना बनाने के प्रयास का हिस्सा हैं। हालांकि, रणनीतिक रूप से अहम स्थान पर उनकी मौजूदगी से दूसरे देशों के व्यापारिक जहाजों के लिए भी जोखिम बढ़ सकता है।
जुलाई में तस्वीर अलग थी
बताया गया है कि जुलाई में हूती विद्रोही बाब अल-मंदेब स्ट्रेट से करीब 100 किलोमीटर दूर तक ही सक्रिय थे और स्ट्रेट के नजदीकी तटीय हिस्से पर उनका सीधा नियंत्रण नहीं था। अब मयून द्वीप पर कब्जे के बाद उनकी स्थिति काफी ज्यादा रणनीतिक हो गई है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर तनाव आगे बढ़ता है तो जहाजों की सुरक्षा, बीमा लागत, ईंधन कीमतों और वैश्विक सप्लाई चेन पर इसका असर पड़ सकता है। यही कारण है कि मयून द्वीप पर हूती कब्जे को लाल सागर क्षेत्र से आगे वैश्विक व्यापार के लिए बड़ी चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है।




