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Cai Qi India : शी जिनपिंग के करीबी कै ची पहुंचे भारत, जानिए चीन की सत्ता में क्यों है उनका इतना प्रभाव

शी जिनपिंग के करीबी कै ची भी भारत पहुंचे, जानिए चीन में क्यों है इतना प्रभाव

नई दिल्ली: भारत में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ पहुंचे वरिष्ठ नेता कै ची पर भी खास नजर है। कै ची को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बेहद करीबी और भरोसेमंद सहयोगियों में माना जाता है। वह चीन की सत्ता के सबसे ताकतवर सात सदस्यीय पोलित ब्यूरो स्थायी समिति का हिस्सा हैं। ऐसे में उनका भारत दौरा केवल एक सामान्य प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी नहीं, बल्कि चीन की शीर्ष राजनीतिक व्यवस्था के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत में 12 और 13 सितंबर को हो रहे ब्रिक्स सम्मेलन में दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के नेता जुटे हैं। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी सात साल बाद भारत पहुंचे हैं। उनके दौरे को भारत-चीन संबंधों में हाल के सुधार के बीच काफी अहम माना जा रहा है। 2020 के गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों के रिश्तों में लंबे समय तक तनाव रहा, लेकिन पिछले कुछ समय में दोनों पक्षों ने संवाद और संपर्क बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं।

कौन हैं कै ची?

कै ची चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष नेताओं में शामिल हैं। 2022 में उन्हें पोलित ब्यूरो स्थायी समिति में जगह मिली थी। यह चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का सबसे शक्तिशाली निर्णय लेने वाला समूह है। समिति में केवल सात सदस्य होते हैं और इसके शीर्ष पर शी जिनपिंग हैं। इसलिए इस समूह का सदस्य होना ही चीन की सत्ता संरचना में बेहद प्रभावशाली स्थिति को दर्शाता है।

कै ची को शी जिनपिंग के करीबी सहयोगी के तौर पर इसलिए भी देखा जाता है क्योंकि दोनों के बीच लंबे समय से राजनीतिक संपर्क रहा है। शी के भरोसेमंद नेताओं में उनकी गिनती होती है और पार्टी के महत्वपूर्ण कामों में उनकी भूमिका लगातार दिखाई देती रही है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया और चीन की राजनीति पर नजर रखने वाले विशेषज्ञ कै ची को अक्सर शी के ‘राइट हैंड’ के तौर पर देखते हैं।

बीजिंग में क्यों चलती है कै ची की तूती?

चीन की राजनीतिक व्यवस्था में सत्ता का बड़ा हिस्सा कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के पास रहता है। पोलित ब्यूरो स्थायी समिति इसी शीर्ष ढांचे का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। कै ची की जिम्मेदारियां केवल एक विभाग तक सीमित नहीं हैं। वह पार्टी के केंद्रीय सचिवालय में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो पोलित ब्यूरो और उसकी स्थायी समिति के कामकाज में सहयोग करता है।

कै ची का प्रभाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह पार्टी संगठन, प्रचार और राजनीतिक दिशा से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में सक्रिय रहे हैं। चीन में पार्टी व्यवस्था के भीतर ऐसे पदों की भूमिका काफी अहम होती है, क्योंकि नीतियों को लागू करने और पार्टी के संदेश को नीचे तक पहुंचाने में इन संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।

भारत दौरे का क्या है महत्व?

कै ची का भारत पहुंचना ऐसे समय हुआ है जब नई दिल्ली और बीजिंग के बीच रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत दिखाई दे रहे हैं। 2024 में सीमा पर सैनिकों की वापसी से जुड़े समझौते के बाद दोनों देशों ने संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। व्यापार और लोगों के बीच संपर्क भी दोबारा बढ़ने लगा है, हालांकि सीमा विवाद और रणनीतिक मतभेद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं।

ऐसे माहौल में शी जिनपिंग के साथ कै ची की मौजूदगी को चीन की ओर से इस सम्मेलन को दिए जा रहे महत्व के तौर पर देखा जा सकता है। ब्रिक्स के मंच पर भारत और चीन के बीच बातचीत, वैश्विक व्यापार, बहुपक्षीय व्यवस्था और विकासशील देशों की भूमिका जैसे मुद्दे अहम रहने वाले हैं।

यानी कै ची का दिल्ली पहुंचना सिर्फ एक चीनी अधिकारी का दौरा नहीं है। यह चीन की शीर्ष सत्ता और शी जिनपिंग के भरोसेमंद राजनीतिक तंत्र की मौजूदगी का संकेत भी है। ऐसे में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान उनकी गतिविधियों और बैठकों पर भी कूटनीतिक नजर बनी रहेगी।

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