
संयुक्त राष्ट्र (UN) के 80 साल के इतिहास में पहली बार किसी महिला के महासचिव बनने की संभावना मजबूत होती नजर आ रही है। महासचिव पद की दौड़ में इस समय कुल 8 उम्मीदवार हैं, जिनमें 5 महिलाएं शामिल हैं। 21 अगस्त को हुई दूसरी अनौपचारिक वोटिंग में गुयाना की कैरोलिन रोड्रिग्स बिर्केट सबसे आगे रहीं। वहीं कोस्टा रिका की रेबेका ग्रिन्सपैन दूसरे प्रमुख दावेदारों में बनी हुई हैं।
मौजूदा महासचिव एंतोनियो गुटेरेस का दूसरा पांच साल का कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 को समाप्त होगा। ऐसे में नए महासचिव के चयन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस बार महिला उम्मीदवारों की मजबूत मौजूदगी ने चुनाव को खास बना दिया है।

दूसरी वोटिंग में बिर्केट ने बनाई बढ़त
21 अगस्त को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 15 सदस्यों ने उम्मीदवारों की स्थिति जानने के लिए अनौपचारिक वोटिंग की। इसमें सदस्य देशों ने उम्मीदवारों के लिए समर्थन, विरोध या कोई राय नहीं होने की स्थिति दर्ज की।
दूसरे दौर में कैरोलिन रोड्रिग्स बिर्केट को 8 देशों का समर्थन मिला, जबकि 3 ने उनके खिलाफ राय दी और 4 देशों ने कोई राय नहीं जताई। इस प्रदर्शन के साथ वह सबसे आगे निकल गईं।
इससे पहले 30 जुलाई को हुई पहली अनौपचारिक वोटिंग में कोस्टा रिका की रेबेका ग्रिन्सपैन सबसे आगे थीं। उन्हें 10 देशों का समर्थन मिला था। इससे साफ है कि शुरुआती दौर में उम्मीदवारों की स्थिति तेजी से बदल सकती है।
महासचिव का चुनाव कैसे होता है?
संयुक्त राष्ट्र महासचिव का चुनाव सीधे सभी 193 सदस्य देशों की वोटिंग से नहीं होता। सबसे पहले सुरक्षा परिषद उम्मीदवारों के नामों पर विचार करती है। सुरक्षा परिषद में 15 सदस्य होते हैं, जिनमें अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस स्थायी सदस्य हैं। इन पांचों देशों के पास वीटो पावर है।
किसी उम्मीदवार को सुरक्षा परिषद की सिफारिश के लिए कम से कम 9 वोटों की जरूरत होती है। लेकिन केवल 9 वोट हासिल करना पर्याप्त नहीं है। पांच स्थायी सदस्यों में से किसी एक की आपत्ति भी उम्मीदवार की राह मुश्किल कर सकती है।
सुरक्षा परिषद में कई दौर की अनौपचारिक वोटिंग और कूटनीतिक बातचीत के बाद जब किसी उम्मीदवार के नाम पर पर्याप्त सहमति बनती है, तो परिषद औपचारिक रूप से उसकी सिफारिश महासभा को भेजती है। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा नियुक्ति को मंजूरी देती है।
80 साल में पहली महिला महासचिव बनने का मौका
अगर इस बार किसी महिला उम्मीदवार के नाम पर सहमति बनती है तो यह संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में ऐतिहासिक बदलाव होगा। 1945 में संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के बाद से अब तक कोई महिला महासचिव नहीं बनी है।
इस बार पांच महिला उम्मीदवारों की मौजूदगी इस चुनाव को और महत्वपूर्ण बनाती है। कैरोलिन रोड्रिग्स बिर्केट और रेबेका ग्रिन्सपैन के अलावा पूर्व चिली राष्ट्रपति मिशेल बाचेलेट, मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा और इवोन ए-बाकी भी दौड़ में शामिल हैं।
2006 में शशि थरूर भी थे उम्मीदवार
भारत की ओर से शशि थरूर भी 2006 में संयुक्त राष्ट्र महासचिव पद के उम्मीदवार रह चुके हैं। उस समय मनमोहन सिंह सरकार ने उनकी उम्मीदवारी का समर्थन किया था। थरूर का संयुक्त राष्ट्र में लंबा अनुभव उनकी सबसे बड़ी ताकत माना जाता था।
हालांकि, अंत में दक्षिण कोरिया के बान की मून महासचिव चुने गए। अब 2026 की इस दौड़ में पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या पहली बार संयुक्त राष्ट्र को महिला महासचिव मिलती है। अगर बिर्केट या कोई अन्य महिला उम्मीदवार अंतिम सहमति हासिल करती है, तो यह UN के इतिहास में एक बड़ा ऐतिहासिक मोड़ होगा।


