सिद्धार्थनगर। जिले के बांसी तहसील क्षेत्र में अवैध खनन के खिलाफ प्रशासन और पुलिस ने आधी रात को अभियान चलाकर एक चिन्हित जेसीबी मशीन को पकड़ा और पुलिस के हवाले कर दिया। प्रशासनिक टीम की यह मध्यरात्रि छापेमारी चर्चा का विषय बन गई है। जहां एक ओर अधिकारियों का कहना है कि यह अवैध खनन पर अंकुश लगाने की कड़ी कार्रवाई है, वहीं दूसरी ओर जेसीबी मालिक ने इस कार्रवाई को “अकारण और पक्षपातपूर्ण” बताते हुए इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया है।

घटना का पूरा घटनाक्रम
जानकारी के मुताबिक, बीती रात करीब 12:30 बजे बांसी तहसील प्रशासन की टीम राजस्व विभाग, पुलिस बल और कुछ स्थानीय अधिकारियों के साथ क्षेत्र में निगरानी अभियान पर निकली थी।
इस टीम का उद्देश्य उन इलाकों में नजर रखना था जहां अवैध मिट्टी और बालू खनन की शिकायतें लगातार मिल रही थीं।
सूत्रों के अनुसार, प्रशासन ने पहले से कुछ जेसीबी और ट्रकों को चिन्हित किया था जो खनन में संलिप्त बताए जा रहे थे। रात में रोड पर गुजर रही एक जेसीबी को रोककर उसकी जांच की गई और फिर उसे पुलिस की कस्टडी में दे दिया गया।
हालांकि मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि उस समय कोई खनन नहीं हो रहा था और मशीन सड़क से होकर अपने कार्यस्थल की ओर जा रही थी।
जेसीबी मालिक का आरोप — “सेलेक्टिव कार्रवाई की गई”
जेसीबी के मालिक ने रात में ही वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल करते हुए प्रशासन पर मनमानी कार्रवाई का आरोप लगाया।
मालिक का कहना है कि उनकी मशीन किसी वैध कार्यस्थल से लौट रही थी और खनन कार्य में शामिल नहीं थी।
“मेरी जेसीबी के कागजात पूरे हैं। फिर भी बिना जांच-पड़ताल पुलिस ने मशीन पकड़ ली। इलाके में कई जगहों पर खुलेआम खनन चल रहा है, लेकिन प्रशासन वहां आंख बंद किए बैठा है,”
— जेसीबी मालिक (वीडियो बयान)
वीडियो वायरल होते ही यह मामला सोशल मीडिया और स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया।
प्रशासन का पक्ष — “अवैध खनन पर जीरो टॉलरेंस नीति”
वहीं प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई खनन माफियाओं के खिलाफ सख्त अभियान का हिस्सा है।
बांसी तहसीलदार ने बताया कि अवैध खनन की शिकायतें लगातार मिल रही थीं, इसलिए देर रात तक क्षेत्र में गश्त की जा रही थी।
“किसी भी स्थिति में अवैध खनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मशीन के वैध कागजात और गतिविधियों की जांच की जा रही है। अगर आरोप झूठे हैं तो जांच में सब स्पष्ट हो जाएगा,”
— बांसी तहसीलदार, सिद्धार्थनगर
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे ऑपरेशन भविष्य में भी जारी रहेंगे और जहां भी अवैध गतिविधि पाई जाएगी, वहां कड़ी कार्रवाई होगी।
खनन क्षेत्र की वास्तविक स्थिति
स्थानीय निवासियों के अनुसार, मरवटिया, अड़गड़हा, सोनखर, और अन्य नदी तटीय क्षेत्रों में महीनों से बालू और मिट्टी का अवैध खनन चल रहा है।
इन क्षेत्रों में रात के समय ट्रैक्टर और हाइड्रा मशीनों के जरिए खनन कर बालू को नजदीकी कस्बों तक पहुंचाया जाता है।
कुछ ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायतें दर्ज होने के बावजूद प्रशासन केवल “औपचारिक कार्रवाई” करता है।
स्थानीय लोगों के बीच यह धारणा गहरी होती जा रही है कि प्रशासन की कार्रवाइयाँ सेलेक्टिव होती हैं — कुछ प्रभावशाली लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं होती, जबकि छोटे ठेकेदारों या किसानों को निशाना बनाया जाता है।
कानूनी दृष्टिकोण और नियम
राज्य सरकार के निर्देशों के अनुसार, अवैध खनन पर जीरो टॉलरेंस नीति लागू है।
खनिज विभाग की अनुमति के बिना किसी भी प्रकार का मिट्टी या बालू उत्खनन अपराध की श्रेणी में आता है।
इसके तहत भारतीय दंड संहिता की धाराओं के साथ खनन अधिनियम 1957 की धारा 21 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाती है।
अधिकारियों के मुताबिक, पकड़ी गई जेसीबी की जांच के बाद यह तय किया जाएगा कि मामला अवैध खनन से जुड़ा है या नहीं।
विवाद और राजनीति की गूंज
इस घटना ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय व्यापारिक और राजनैतिक वर्ग में यह चर्चा है कि कुछ अधिकारी “चयनात्मक कार्रवाई” कर रहे हैं — जिससे ईमानदार व्यवसायी भी भयभीत हैं।
एक स्थानीय जनप्रतिनिधि ने नाम न बताने की शर्त पर कहा:
“अगर प्रशासन सच्चे अर्थों में खनन माफियाओं पर नकेल कसना चाहता है, तो उसे पूरे क्षेत्र में निष्पक्षता से कार्रवाई करनी चाहिए। केवल दिखावे के लिए एक-दो मशीनें पकड़ना जनता को भ्रमित करना है।”
सोशल मीडिया पर बढ़ी प्रतिक्रिया
जेसीबी मालिक का वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने प्रशासन की आलोचना की है।
कुछ ने इसे सही कदम बताया, तो कई यूजर्स ने लिखा कि “पकड़ने की हिम्मत केवल आम आदमी पर होती है, बड़े खनन माफिया खुलेआम घूमते हैं।”
टिप्पणीकारों का कहना है कि प्रशासन अगर वास्तव में पारदर्शी तरीके से काम करे, तो जिले में अवैध खनन जैसी गतिविधियाँ पूरी तरह समाप्त हो सकती हैं।
पर्यावरणीय प्रभाव और चिंताएँ
नदियों के पाटों में लगातार हो रहे अवैध खनन से जलस्तर में गिरावट, नदी तटीय मिट्टी का क्षरण और जैव विविधता का ह्रास हो रहा है।
सोनखर और अड़गड़हा नदी तट पर मिट्टी की परतें उखाड़े जाने से स्थानीय किसानों की जमीनें भी प्रभावित हो रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह प्रवृत्ति नहीं रोकी गई, तो आने वाले वर्षों में सिद्धार्थनगर के कई इलाकों में जल संकट और मिट्टी की गुणवत्ता पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
भविष्य की दिशा — सख्त निगरानी की ज़रूरत
इस पूरे विवाद ने यह साफ कर दिया है कि प्रशासनिक कार्रवाई तभी प्रभावी होगी जब वह समान रूप से लागू की जाए।
अवैध खनन के खिलाफ केवल दिखावटी कदम नहीं, बल्कि सतत निगरानी, जीपीएस ट्रैकिंग, स्थानीय गश्त और व्हिसलब्लोअर तंत्र की आवश्यकता है।
कई विशेषज्ञों का सुझाव है कि:
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हर तहसील में खनन निगरानी समिति गठित की जाए।
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रात्रि गश्त को नियमित बनाया जाए।
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खनन स्थलों की ड्रोन मॉनिटरिंग शुरू की जाए।
सिद्धार्थनगर के बांसी तहसील क्षेत्र में की गई यह आधी रात की प्रशासनिक कार्रवाई ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि क्या प्रशासन वास्तव में अवैध खनन रोकने के लिए गंभीर है, या यह केवल चयनात्मक कार्रवाई तक सीमित रह गया है?
जहाँ एक ओर प्रशासन इसे अपनी सख्ती का प्रतीक बता रहा है, वहीं जनता इसे भेदभावपूर्ण कदम मान रही है।
सच्चाई चाहे जो भी हो, इतना तय है कि जब तक निगरानी तंत्र निष्पक्ष और पारदर्शी नहीं होगा, तब तक अवैध खनन जैसी समस्याएँ सिर्फ “खबरों की सुर्खियों” में रह जाएँगी, ज़मीन पर नहीं रुकेंगी।
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