कन्नौज। उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले के छिबरामऊ कोतवाली क्षेत्र में एक दर्दनाक सड़क हादसे ने शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों को झकझोर दिया है। वहीं सवार बाइक और तेज रफ्तार ट्रक की भयानक टक्कर में एक 8-9 वर्षीय बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसके पिता को गंभीर हालत में 100-बेड अस्पताल (सौ शय्या) रेफर किया गया है और मां तथा छोटे भाई का उपचार वहीं जारी है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और ट्रक ड्राइवर की तलाश में जुटी है।

घटनाक्रम: कैसे हुआ हादसा?
यह भयानक हादसा फर्रुखाबाद चौराहे (छिबरामऊ-कोतवाली क्षेत्र) पर उस समय हुआ जब स्थानीय निवासी रंजू रविवार दोपहर को अपनी पत्नी, बेटे और बेटी को साथ लेकर बाइक पर सवार था। परिवार सौरिख-के पिपरिया गांव से ससुराल जा रहा था, तभी सामने से तेज रफ्तार एक ट्रक ने बाइक को टक्कर मार दी।
टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक सवार परिवार सड़क पर जमीन पर जा गिरा। आसपास मौजूद ग्रामीण और राहगीर तुरंत मौके पर पहुंचे और घायलों को उठाकर पुलिस और एम्बुलेंस को सूचना दी। घटना स्थल पर बाइक पर बैठी छोटी-सी बच्ची को गंभीर चोटें आईं, जिन्हें परिजन और ग्रामीण तुरंत अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मौके पर ही मृत घोषित कर दिया।
पीड़ित परिवार की स्थिति
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बच्ची (नाम जारी नहीं) को डॉक्टरों ने जन्मिक चोटें एवं आघात के परिणाम बताया, जिसके कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका।
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पिता रंजू की हालत चिंताजनक बताई जा रही है, जिसे दुर्घटना के तुरंत बाद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया और गंभीर स्थिति के कारण 100-बेड मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया गया है।
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मां और छोटे भाई भी चोटों के साथ इलाजाधीन हैं; अस्पताल सूत्रों के अनुसार परिवार की हालत स्थिर पर नाजुक बनी हुई है।
स्पष्ट जानकारी यह है कि बच्ची बिना हेलमेट और सुरक्षा उपकरणों के बाइक पर बैठी थी, जो हादसे की गंभीरता को और बढ़ा देती है। इस तरह के संरक्षण उपायों की कमी ग्रामीण इलाकों में रोड सुरक्षा को कमजोर करती है।
पुलिस की कार्यवाही और कानूनी पहल
घटना की सूचना पाते ही छिबरामऊ कोतवाली पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने प्राथमिक जांच में यह पाया है कि ट्रक चालक हादसे के बाद भागने में सफल रहा। इसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) और मोटर व्हीकल एक्ट की उपयुक्त धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है।
पुलिस अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि ट्रक की रफ्तार अत्यधिक थी और स्थानीय मार्ग स्थित लोगों ने बताया कि उस मार्ग पर गति नियंत्रण एवं सड़क संकेतों का अभाव है।
“हम ट्रक चालक की पहचान कर उसे जल्द गिरफ्तार करेंगे। मामले की पूर्ण जांच जारी है और आसपास के सीसीटीवी फुटेज एवं स्थानीय गवाहों के बयान लिए जा रहे हैं,” — स्थानीय पुलिस अधिकारी ने बताया।
सड़क सुरक्षा का व्यापक मुद्दा
यह दुर्घटना सिर्फ एक परिवार के लिये दुखद नहीं है, बल्कि कानून-व्यवस्था और सड़क सुरक्षा की व्यापक समस्या का एक उदाहरण है। उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में ट्रक-बाइक टक्कर के कारण होने वाली मौतों की संख्या चिंताजनक रूप से बढ़ी है। पिछले साल भी कन्नौज सहित आसपास के इलाकों में ट्रक-बाइक टक्कर से लोग मारे गए थे, जिससे सड़क सुरक्षा को लेकर सजगता की मांग बढ़ी थी।
विश्लेषकों के अनुसार:
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ग्रामीण मार्गों पर तेज़ रफ्तार वाहनों का नियंत्रण, उचित सुरक्षा संकेत, हेलमेट का उपयोग आदि नीतिगत सुधारों की कड़ी आवश्यकता है।
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सड़क किनारे पाकिस्तान एवं सुरक्षा निगरानी कैमरों की कमी से मामलों की जांच में समय लगता है।
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स्थानीय स्तर पर सड़क सुरक्षा शिक्षा प्रतिस्थान (जैसे हेलमेट पहनने का महत्व) को बढ़ावा देना जरूरी है।
प्रभाव और स्थानीय प्रतिक्रिया
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय ग्रामीणों और परिवार के लोगों में गहरा रोष और शोक देखा गया। लोग सड़क की सुरक्षा और त्रुटियों के खिलाफ सवाल उठा रहे हैं। आसपास के ग्रामीणों ने कहा कि यह सड़क खतरनाक है और कई बार शीघ्र गति और लापरवाही से गाड़ी चलने वाले ट्रकों का सामना करना पड़ता है।
एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा:
“हम बार-बार प्रशासन से कह रहे हैं कि इस मार्ग पर गति नियंत्रण और सड़क संकेत लगवाये जाएं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।”
परिवार की आर्थिक व सामाजिक स्थिति
रंजू का परिवार खेती-किसानी तथा छोटे रोजगार से जुड़ा हुआ है। हादसे के पश्चात बच्चे की मौत और पिता की गंभीर स्थिति ने परिवार की आर्थिक स्थिति को और अधिक कमजोर कर दिया है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता परिवार की सहायता के लिये आगे आए हैं और प्रशासन से छात्रा की अंतिम यात्रा एवं सहायता पैकेज की मांग कर रहे हैं।
कन्नौज के छिबरामऊ क्षेत्र में हुए इस दर्दनाक सड़क हादसे में एक मासूम बच्ची की मौत और दो अन्य परिवार सदस्यों की चोट ने सड़क सुरक्षा की अनदेखी, तेज रफ्तार और सुरक्षा उपायों की कमी को फिर से उजागर किया है। ट्रक चालक की गिरफ्तारी, सड़क संकेतों एवं सुरक्षा उपायों में सुधार, तथा ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा शिक्षा के विस्तार को प्राथमिकता देना अब अत्यावश्यक हो गया है।
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