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Hospital Violence Dholpur : धौलपुर अस्पताल में हंगामा, महिला की मौत पर डॉक्टरों पर हमला

धौलपुर, राजस्थान।
राजस्थान के धौलपुर जिले में रविवार देर रात एक निजी अस्पताल में महिला की मौत के बाद गुस्साए परिजनों ने जमकर हंगामा किया। मामला इतना बढ़ गया कि परिजनों ने डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारियों पर ही हमला बोल दिया। घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें भीड़ अस्पताल परिसर में घुसकर तोड़फोड़ करती और डॉक्टरों को पीटती दिखाई दे रही है। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए छह लोगों को हिरासत में लिया है और मामले की जांच जारी है।


क्या है पूरा मामला

जानकारी के मुताबिक, धौलपुर शहर के भारत हॉस्पिटल में एक महिला को गंभीर हालत में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान महिला की तबीयत और बिगड़ गई और डॉक्टरों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन आखिरकार उसकी मौत हो गई।
मौत की खबर सुनते ही परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू कर दिया। देखते ही देखते दर्जनों लोग अस्पताल में घुस आए और डॉक्टरों व नर्सिंग स्टाफ से मारपीट करने लगे। कुछ लोगों ने अस्पताल की खिड़कियां, गेट और मेडिकल उपकरणों को भी नुकसान पहुंचाया।

अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। कई डॉक्टर और स्टाफ सदस्य खुद को सुरक्षित कमरे में बंद करके जान बचाने की कोशिश करते दिखे। बाद में किसी ने घटना की सूचना पुलिस को दी।


पुलिस की त्वरित कार्रवाई

घटना की सूचना मिलते ही धौलपुर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने तत्काल स्थिति को नियंत्रण में लिया और घायल डॉक्टरों व कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाला।
धौलपुर एसपी के अनुसार, “हमें भारत हॉस्पिटल से सूचना मिली कि मरीज की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में तोड़फोड़ और मारपीट की है। पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर हालात को संभाला और वीडियो फुटेज की मदद से 6 आरोपियों को हिरासत में लिया गया है।”

पुलिस ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं, ताकि बाक़ी लोगों की भी पहचान की जा सके जिन्होंने हिंसा में भाग लिया। सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।


डॉक्टरों ने जताई नाराज़गी, सुरक्षा की मांग की

इस घटना के बाद स्थानीय डॉक्टर संघ ने प्रशासन के खिलाफ कड़ा रोष जताया है। डॉक्टरों ने कहा कि अस्पतालों में सुरक्षा के पर्याप्त इंतज़ाम नहीं हैं।
डॉ. संदीप शर्मा, जो घटना के समय मौके पर मौजूद थे, ने बताया —

“हम लोग मरीज की जान बचाने के लिए 24 घंटे मेहनत करते हैं, लेकिन अगर हर बार किसी की मौत के बाद हमें ही दोषी ठहराया जाएगा और हमारे साथ मारपीट होगी, तो कोई भी डॉक्टर इस पेशे में सुरक्षित महसूस नहीं करेगा।”

राज्य के डॉक्टर संघ ने सरकार से मांग की है कि अस्पतालों में स्थायी पुलिस चौकी स्थापित की जाए और मेडिकल कर्मियों की सुरक्षा के लिए कड़े कानूनों को सख्ती से लागू किया जाए।


वीडियो वायरल, सोशल मीडिया पर आक्रोश

घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। वीडियो में कुछ लोग डॉक्टरों को धक्का-मुक्की करते और अस्पताल के अंदर तोड़फोड़ करते नज़र आ रहे हैं।
कई यूज़र्स ने इस तरह की हिंसा को “अस्वीकार्य” बताते हुए कहा कि डॉक्टरों के साथ हिंसा करने वाले लोगों पर उदाहरण स्वरूप कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।


राज्य सरकार की गाइडलाइन पर भी सवाल

राजस्थान सरकार ने कुछ वर्ष पहले डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर सख्त गाइडलाइन जारी की थी। इन गाइडलाइनों के अनुसार, किसी भी चिकित्सा संस्थान में हिंसा करने वालों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में केस दर्ज किया जा सकता है।
इसके बावजूद हाल के वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहाँ डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर हमला किया गया है।

राजस्थान मेडिकल एसोसिएशन (RMA) के एक पदाधिकारी ने बताया,

“सरकार के पास कागज़ी गाइडलाइन तो हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका पालन नहीं हो रहा। जब तक अस्पतालों में पर्याप्त सुरक्षा बल नहीं होगा, ऐसी घटनाएँ रुकना मुश्किल है।”


पुलिस जांच में क्या निकलकर आया

धौलपुर पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मृत महिला को गंभीर अवस्था में अस्पताल लाया गया था और डॉक्टरों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की थी।
मगर परिजनों को शक था कि इलाज में लापरवाही हुई है। इसी शक ने देखते-देखते हिंसा का रूप ले लिया।
पुलिस के मुताबिक, जांच में यह भी सामने आया कि कुछ बाहरी लोग भी मौके पर मौजूद थे जिन्होंने भीड़ को भड़काया। पुलिस अब इन लोगों की पहचान कर रही है।


स्वास्थ्य सेवाओं पर असर

डॉक्टरों पर बढ़ते हमलों का सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता है। कई बार डॉक्टर डर के कारण गंभीर मामलों में जोखिम नहीं लेना चाहते या मरीजों के परिजनों से दूरी बनाकर रखते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समाज डॉक्टरों पर भरोसा खो देगा, तो इलाज की गुणवत्ता और सेवा भावना दोनों प्रभावित होंगी।

एक वरिष्ठ चिकित्सक ने कहा —

“हर मौत के पीछे डॉक्टर जिम्मेदार नहीं होता। कई बार मरीज की हालत इतनी गंभीर होती है कि प्रयासों के बावजूद जान नहीं बचाई जा सकती। लेकिन जब डॉक्टरों पर ही हमला होगा, तो यह पूरे सिस्टम को कमजोर कर देगा।”


कानूनी पहलू और आगामी कार्रवाई

पुलिस ने फिलहाल भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147, 149, 323, 332, 353 और 427 के तहत मामला दर्ज किया है — जो मारपीट, सरकारी कार्य में बाधा और संपत्ति नुकसान से जुड़ी धाराएँ हैं।
पुलिस ने यह भी संकेत दिया है कि अगर डॉक्टरों की सुरक्षा कानून (Medical Protection Act) के तहत अपराध साबित होता है, तो आरोपियों को और सख्त सज़ा मिल सकती है।

धौलपुर के एएसपी ने कहा कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने बताया कि सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं।


अस्पताल प्रशासन का बयान

भारत हॉस्पिटल प्रशासन ने कहा है कि डॉक्टरों ने पूरी निष्ठा के साथ इलाज किया। अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस से सुरक्षा मांगी है और सरकार से गुज़ारिश की है कि डॉक्टरों की सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाएँ और मज़बूत की जाएँ।
अस्पताल प्रबंधक ने कहा —

“हमारे डॉक्टरों को सिर्फ इसलिए मारा गया क्योंकि उन्होंने सच्चाई बताई कि मरीज नहीं बच सकी। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सेवा भाव से काम करने वाले चिकित्सक आज खुद असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।”

धौलपुर की यह घटना एक बार फिर से उस दर्दनाक सच्चाई को सामने लाती है कि समाज में डॉक्टरों की सुरक्षा कितनी नाज़ुक स्थिति में है। एक ओर डॉक्टर दिन-रात मरीजों की जान बचाने की कोशिश करते हैं, वहीं दूसरी ओर ग़ुस्साई भीड़ उन पर हिंसा कर देती है।
इस घटना ने सरकार और समाज दोनों के सामने यह सवाल खड़ा कर दिया है — आखिर कब तक डॉक्टर डर के साए में काम करेंगे?

राज्य सरकार की गाइडलाइनों को ज़मीनी स्तर पर लागू करने और अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्थाओं को मज़बूत करने की तत्काल ज़रूरत है।
साथ ही, आम नागरिकों को भी समझना होगा कि हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं — बल्कि इलाज व्यवस्था को और असुरक्षित बना देती है।

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