उत्तर प्रदेश के हरदोई जनपद से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां प्रसव के लिए एम्बुलेंस से सरकारी अस्पताल पहुंची एक महिला और उसके नवजात की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। आरोप है कि प्रसूता को करीब तीन घंटे तक दर्द में तड़पता छोड़ दिया गया, जबकि ड्यूटी पर तैनात नर्सें सोती रहीं।
पूरा मामला हरदोई जनपद के शाहाबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि प्रसव पीड़ा होने पर परिजन महिला को एम्बुलेंस के जरिए शाहाबाद सीएचसी लेकर पहुंचे थे। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद भी समय पर न तो डॉक्टर मौजूद थे और न ही नर्सिंग स्टाफ ने गंभीरता दिखाई।
परिजनों का कहना है कि महिला करीब तीन घंटे तक तेज प्रसव पीड़ा में तड़पती रही, लेकिन उसे समय पर न तो प्राथमिक उपचार मिला और न ही आवश्यक जांच की गई। आरोप है कि इस दौरान ड्यूटी पर मौजूद नर्सें सोती रहीं और बार-बार गुहार लगाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
जब महिला की हालत ज्यादा बिगड़ने लगी, तब तक काफी देर हो चुकी थी। इलाज में देरी के चलते पहले नवजात की मौत हो गई और कुछ ही देर बाद प्रसूता ने भी दम तोड़ दिया। जच्चा-बच्चा की मौत की खबर मिलते ही अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई।
घटना से आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया। उन्होंने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए दोषी स्टाफ पर सख्त कार्रवाई और पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की मांग की। हालात बिगड़ते देख मौके पर पुलिस को बुलाया गया, जिसने किसी तरह लोगों को शांत कराया।
परिजनों का आरोप है कि यदि समय रहते इलाज किया गया होता, तो मां और नवजात दोनों की जान बचाई जा सकती थी। यह घटना एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं और स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
फिलहाल मामले की सूचना स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों को दे दी गई है। जांच के आदेश दिए जाने की बात कही जा रही है। अब बड़ा सवाल यही है कि क्या इस मामले में दोषियों पर कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।
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