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Hardoi Paddy Scam : हरदोई संडीला धान घोटाला, फर्जी किसानों पर FIR

उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के संडीला क्षेत्र से एक बड़ा धान खरीद घोटाला उजागर हुआ है। इस मामले में फर्जी किसानों के नाम पर धान खरीद का सत्यापन किया गया और प्रशासनिक लापरवाही के कारण करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। जांच में कई लेखपाल और कंप्यूटर ऑपरेटरों का नाम सामने आया है, जिनके खिलाफ स्थानीय पुलिस ने FIR दर्ज कर दी है।

घटना के अनुसार, जिले के संडीला क्षेत्र में सरकारी तंत्र द्वारा आयोजित धान खरीद कार्यक्रम में फर्जी किसानों के नाम पर धान खरीद के दस्तावेज तैयार किए गए। अधिकारियों की मिलीभगत और कंप्यूटर ऑपरेटरों के सहयोग से यह फर्जीवाड़ा किया गया। इस घोटाले की जानकारी मिलने के बाद जिला प्रशासन ने इसकी प्रारंभिक जांच शुरू की, और आगे चलकर पुलिस ने कई अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी।

घोटाले का प्रारंभिक विवरण

जानकारी के मुताबिक, धान खरीद केंद्रों में फर्जी किसानों के नाम पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया गया। इन रजिस्ट्रेशन में किसानों के बैंक खाते और आधार कार्ड की जानकारी को गलत ढंग से दर्ज किया गया। कंप्यूटर ऑपरेटरों ने इस प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाई, जिससे फर्जी दस्तावेज तैयार किए जा सके।

स्थानीय किसानों के अनुसार, वास्तविक किसानों के धान खरीद रजिस्ट्रेशन में देरी हुई, जबकि फर्जी नामों पर करोड़ों रुपये का भुगतान हो गया। इस बात का खुलासा तब हुआ जब कुछ किसानों ने अपने बैंक खातों में भुगतान न होने की शिकायत जिला प्रशासन और मीडिया के सामने की।

लेखपाल और अन्य अधिकारियों की भूमिका

जांच में यह सामने आया कि कई लेखपालों ने भी इस घोटाले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लेखपालों ने फर्जी किसानों के दस्तावेजों को सत्यापित किया और कंप्यूटर ऑपरेटरों के साथ मिलकर सरकारी रिकॉर्ड में बदलाव किया।

एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “कुछ लेखपाल और ऑपरेटर सिस्टम में छेड़छाड़ कर रहे थे। उन्होंने वास्तविक किसानों के दस्तावेजों को अनदेखा किया और फर्जी नामों को मंजूरी दे दी।”

पुलिस की कार्रवाई

घोटाले की रिपोर्ट मिलने के बाद संडीला थाना पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने लेखपाल और कंप्यूटर ऑपरेटरों के खिलाफ FIR दर्ज की और उनकी जांच में जुट गई। प्रारंभिक रिपोर्ट में यह बताया गया है कि फर्जी किसानों के खातों में भारी रकम ट्रांसफर की गई थी।

पुलिस ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी संदिग्धों के बैंक लेन-देन की भी जांच की जाएगी। इसके अलावा, सरकारी रिकॉर्ड की भी क्रॉस-चेकिंग शुरू कर दी गई है, ताकि अन्य संभावित गड़बड़ियों का पता लगाया जा सके।

किसानों की प्रतिक्रिया

स्थानीय किसानों में इस घोटाले को लेकर भारी रोष है। कई किसानों ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि वे इस भ्रष्टाचार से बेहद दुखी हैं। उन्होंने अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई।

एक वरिष्ठ किसान ने कहा, “हम मेहनत करके धान उगाते हैं, लेकिन फर्जी नामों पर पैसे निकलने से हमें नुकसान होता है। यह हमारी मेहनत की अवहेलना है। प्रशासन को ऐसे अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।”

प्रशासनिक जवाब

हरदोई जिला प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कदम उठाने की घोषणा की। जिला अधिकारियों ने कहा कि घोटाले में शामिल सभी कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में ऐसी गड़बड़ी न हो, इसके लिए निगरानी बढ़ाई जाएगी।

जिलाधिकारी ने बताया कि “हम फर्जीवाड़े में शामिल लोगों को बख्शेंगे नहीं। हमारी प्राथमिकता वास्तविक किसानों के हित की रक्षा करना है। इस घोटाले की जांच में किसी को भी बचाया नहीं जाएगा।”

संभावित वित्तीय नुकसान

प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, इस धान खरीद घोटाले में करोड़ों रुपये का सरकारी धन हड़प लिया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय पर उचित कदम न उठाए गए होते, तो यह राशि और बढ़ सकती थी।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि उत्तर प्रदेश में ऐसे मामले आम हैं और डिजिटल प्रणाली में सुधार और निगरानी बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, “कंप्यूटर ऑपरेटरों और लेखपालों के फर्जीवाड़े को रोकने के लिए सिस्टम में ऑडिटिंग और रियल-टाइम मॉनिटरिंग अनिवार्य होनी चाहिए।”

भविष्य की रणनीति

जिला प्रशासन ने घोषणा की है कि भविष्य में धान खरीद प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाया जाएगा। सभी रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन होंगे और हर कदम पर किसानों की पहचान सत्यापित की जाएगी।

इसके अलावा, अधिकारियों को चेतावनी दी गई है कि अगर कोई भी कर्मचारी सिस्टम के साथ छेड़छाड़ करता पाया गया, तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

हरदोई संडीला का यह धान खरीद घोटाला न केवल प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे डिजिटल प्रणाली में निगरानी की कमी से सरकारी धन का दुरुपयोग हो सकता है। इस मामले में FIR दर्ज होने और पुलिस जांच शुरू होने से यह उम्मीद जताई जा रही है कि दोषियों के खिलाफ न्यायिक कार्रवाई होगी और वास्तविक किसानों को उनका हक मिलेगा।

स्थानीय मीडिया और अधिकारियों की सक्रियता से यह मामला अब न्यायालय और उच्च प्रशासन के सामने है। जनता की निगाहें इस मामले पर टिकी हैं और सभी चाहते हैं कि सच्चाई सामने आए और दोषियों को सजा मिले।

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