Monday , February 2 2026

Mysterious Disease-रहस्यमयी बीमारी से दर्जनों गांवों के 40–50 बच्चे पीड़ित, राज्यपाल तक पहुंची दिव्यांग बच्चों की आवाज

बच्चे किसी भी मां-बाप के लिए ईश्वर का सबसे बड़ा वरदान होते हैं, लेकिन जब वही बच्चे एक रहस्यमयी बीमारी की वजह से दिव्यांग बन जाएं, तो यह वरदान जीवन भर की पीड़ा में बदल जाता है। कुछ ऐसा ही दर्दनाक मंजर गाजीपुर जिले के करीब एक दर्जन गांवों में देखने को मिल रहा है, जहां बच्चे जन्म के समय पूरी तरह स्वस्थ होते हैं, लेकिन कुछ महीनों या वर्षों बाद अचानक तेज बुखार आता है और वही बुखार उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से दिव्यांग बना देता है। हालात इतने भयावह हैं कि माता-पिता अपने बच्चों को रस्सियों या जंजीरों से बांधकर रखने को मजबूर हैं।

गाजीपुर जिले के फतेहुल्लापुर, बहादीपुर, हरिहरपुर, हाला, छोटी जंगीपुर, पठानपुर, शिकारपुर, धरी कला, अगस्ता, भोरहा, भिक्केपुर, तारडीह, गोला और रठूली सहित कई गांवों में एक रहस्यमयी बीमारी ने दस्तक दे रखी है। इन गांवों में करीब 40 से 50 बच्चे इस बीमारी से पीड़ित बताए जा रहे हैं।
परिजनों के अनुसार, अधिकतर बच्चे जन्म के समय बिल्कुल स्वस्थ थे, लेकिन 4 महीने, 6 महीने, 1 साल, 2 साल या 5 साल की उम्र में अचानक तेज बुखार आया और उसके बाद बच्चों की शारीरिक और मानसिक स्थिति बिगड़ती चली गई। कई बच्चे मानसिक रूप से दिव्यांग हो गए तो कई के हाथ-पैरों ने काम करना बंद कर दिया। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इन बच्चों के लक्षण लगभग एक जैसे हैं।

हरिहरपुर गांव की दो मासूम बच्चियां इसका जीता-जागता उदाहरण हैं। दोनों बच्चियां जन्म के समय पूरी तरह स्वस्थ थीं, लेकिन एक को चार महीने बाद और दूसरी को छह महीने बाद तेज बुखार आया, जिसके बाद दोनों मानसिक रूप से दिव्यांग हो गईं। परिजनों ने इलाज में लाखों रुपये खर्च कर दिए, लेकिन आज तक यह पता नहीं चल सका कि आखिर यह कौन-सी बीमारी या वायरस है जो इन बच्चों को अपनी चपेट में ले रहा है।
इन बच्चियों के पिता रोजी-रोटी के लिए गुजरात में रहकर काम करते हैं और इलाज के खर्च के लिए घर तक नहीं आते, ताकि आने-जाने का पैसा भी बच्चों के इलाज में भेजा जा सके।

यह दर्द सिर्फ एक परिवार का नहीं है। हर गांव में 8 से 10 बच्चे इसी तरह की बीमारी से पीड़ित हैं। कुछ बच्चे जन्म से दिव्यांग हैं, तो कई समय बीतने के बाद अचानक इस बीमारी की चपेट में आ गए। हालात इतने गंभीर हैं कि कई परिवार अपने दिव्यांग बच्चों को रस्सियों या जंजीरों से बांधकर रखने को मजबूर हैं, ताकि वे इधर-उधर न भागें, खुद को या दूसरों को नुकसान न पहुंचाएं और गुम न हो जाएं।

इन दिव्यांग बच्चों की पीड़ा को सामने लाने का काम राष्ट्रीय युवा सम्मान से सम्मानित युवक सिद्धार्थ राय ने किया। शुरुआत में उन्होंने इस बीमारी को सामान्य मानते हुए जिलाधिकारी के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखा, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने गांव में एक सामान्य स्वास्थ्य शिविर लगाया। लेकिन जब स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ, तब यह साफ हो गया कि यह बीमारी सामान्य नहीं बल्कि रहस्यमयी और गंभीर है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सिद्धार्थ राय ने इन बच्चों की आवाज सीधे राज्यपाल आनंदीबेन पटेल तक पहुंचाई। राज्यपाल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अपने विशेष कार्याधिकारी एवं अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी डॉ. सुधीर एम. बोबडे के माध्यम से गाजीपुर जिलाधिकारी को पत्र भेजा, जिसमें इस बीमारी की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने और सचिवालय को अवगत कराने के निर्देश दिए गए।
राज्यपाल के निर्देश के बाद गाजीपुर जिलाधिकारी ने सिद्धार्थ राय को अपने कार्यालय बुलाकर पूरे मामले की जानकारी ली और आश्वासन दिया कि इस गंभीर समस्या पर ठोस और प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।

बाइट – सिद्धार्थ राय (राष्ट्रीय युवा सम्मान से सम्मानित):
“यह कोई सामान्य बीमारी नहीं है। एक दर्जन से ज्यादा गांवों के बच्चों में एक जैसे लक्षण मिल रहे हैं। जरूरत है कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम बनाकर इसकी गहन जांच कराई जाए, ताकि इन बच्चों को सही इलाज मिल सके।”

बाइट – गायत्री देवी (दिव्यांग बच्ची की मां):
“हमारी बेटी पैदा तो बिल्कुल ठीक हुई थी, लेकिन बुखार के बाद सब कुछ बदल गया। आज वो खुद कुछ नहीं कर सकती, इलाज में सब कुछ बिक गया।”

बाइट – सुभावती देवी (दिव्यांग बच्ची की मां):
“सरकार अगर मदद न करे तो हम अपने बच्चों को कैसे बचाएंगे? रोज यही डर रहता है कि आगे क्या होगा।”

बाइट – त्रिवेणी चौहान (अभिभावक):
“हर गांव में कई बच्चे इस बीमारी से जूझ रहे हैं। अब उम्मीद बस प्रशासन और सरकार से है।”

OUTRO:
गाजीपुर के इन गांवों में फैली यह रहस्यमयी बीमारी न सिर्फ स्वास्थ्य विभाग, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए एक बड़ी चुनौती है। अब देखना यह होगा कि राज्यपाल के निर्देश के बाद प्रशासन इस पर कितनी तेजी और गंभीरता से कार्रवाई करता है, ताकि इन मासूम बच्चों और उनके परिवारों को राहत मिल सके।

Check Also

Border 2 Storm : सनी देओल की ‘बॉर्डर 2’ ने बॉक्स ऑफिस पर मचाया तूफान, नौवें दिन भी कायम धमाकेदार रफ्तार”

मुंबई। सनी देओल एक बार फिर बॉक्स ऑफिस पर अपना दबदबा कायम करने में सफल …