उन्नाव के अकरमपुर में रिमझिम स्टील पर प्रदूषण फैलाने के गंभीर आरोप, कांग्रेस जिलाध्यक्ष की शिकायत पर प्रशासन हरकत में

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प्रदूषण नियंत्रण विभाग की चार सदस्यीय टीम ने की औचक जांच, चिमनियों से धुआं निकलने और केमिकल युक्त पानी बहाने के आरोपों की पड़ताल
उन्नाव जनपद के औद्योगिक क्षेत्र अकरमपुर में स्थित रिमझिम स्टील फैक्ट्री एक बार फिर चर्चा में है। इस बार कारण है—पर्यावरण प्रदूषण फैलाने के गंभीर आरोप। कांग्रेस जिलाध्यक्ष द्वारा जिला प्रशासन को सौंपी गई शिकायत के बाद जिले का प्रशासन हरकत में आया और प्रदूषण नियंत्रण विभाग की चार सदस्यीय टीम ने मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया। जांच के दौरान चिमनियों से उठते घने धुएं और फैक्ट्री परिसर से बह रहे केमिकल युक्त पानी ने अधिकारियों को भी चौंका दिया।
बताया जा रहा है कि बीते सप्ताह कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने डीएम को लिखित शिकायत सौंपी थी, जिसमें रिमझिम स्टील पर स्थानीय पर्यावरण मानकों का खुलेआम उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया था। शिकायत में कहा गया कि फैक्ट्री की चिमनियों से अत्यधिक धुआं निकलता है, जिससे आसपास के गांवों में सांस संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं। इसके अलावा, फैक्ट्री से निकलने वाले अपशिष्ट जल (केमिकल युक्त पानी) को बिना ट्रीटमेंट के पास की नालियों में छोड़ा जा रहा है, जिससे खेतों और भूजल पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
डीएम ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रदूषण नियंत्रण विभाग को जांच के निर्देश दिए। इसके बाद चार सदस्यीय विशेषज्ञ टीम का गठन किया गया, जिसमें पर्यावरण इंजीनियर, केमिकल एनालिस्ट और फील्ड इंस्पेक्टर शामिल थे।
सूत्रों के अनुसार, जब जांच टीम अचानक रिमझिम स्टील पहुंची, तो फैक्ट्री में उत्पादन पूरी गति से चल रहा था। टीम ने सबसे पहले चिमनियों से निकलते धुएं के सैंपल लिए और हवा की गुणवत्ता (Air Quality) मापने के उपकरणों की मदद से मौके पर ही प्राथमिक जांच की।
प्राथमिक रिपोर्ट के मुताबिक, उत्सर्जन (Emission) की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई।
इसके साथ ही, जांच अधिकारियों ने फैक्ट्री के पीछे बहने वाले नाले से भी पानी के सैंपल लिए। पानी का रंग गाढ़ा भूरा और उसमें तेज रासायनिक गंध थी। प्रारंभिक निरीक्षण में यह पाया गया कि फैक्ट्री के वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (ETP) को या तो ठीक से संचालित नहीं किया जा रहा या जानबूझकर बायपास कर दिया गया है।
अकरमपुर और आसपास के कई गांवों के लोग लंबे समय से इस फैक्ट्री से हो रहे प्रदूषण की शिकायत कर रहे हैं। स्थानीय निवासी बताते हैं कि हवा में धुआं इतना घना हो जाता है कि सुबह-सुबह सांस लेना मुश्किल हो जाता है। कई ग्रामीणों ने बताया कि बच्चों और बुजुर्गों को अक्सर खांसी, एलर्जी और आंखों में जलन जैसी समस्याएं रहती हैं।
एक ग्रामीण, रामकिशोर (45) का कहना है,
“रात में जब फैक्ट्री का काम बढ़ता है तो हवा में जलने जैसी बदबू फैल जाती है। हमारे खेतों में पानी का रंग भी बदल गया है। पेड़ों की पत्तियां पीली पड़ रही हैं।”
इसी तरह एक महिला किसान, सावित्री देवी ने बताया,
“हमने कई बार शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अब जाकर प्रशासन ने ध्यान दिया है।”
कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने यह मामला तभी उठाया जब स्थानीय लोगों ने बार-बार शिकायत की और कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
उनका कहना है कि,
“रिमझिम स्टील जैसी बड़ी कंपनियां अगर पर्यावरण के नियमों की धज्जियां उड़ाएंगी तो आम जनता पर इसका सीधा असर पड़ेगा। हम विकास के विरोधी नहीं, लेकिन विकास की कीमत जनस्वास्थ्य से नहीं चुकाई जा सकती।”
जांच टीम ने अपनी प्राथमिक रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंप दी है। रिपोर्ट के अनुसार, उत्सर्जन की मात्रा निर्धारित मानकों से अधिक पाई गई और पानी के सैंपल में रासायनिक तत्वों की उपस्थिति स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि
“फैक्ट्री के अंदर प्रदूषण नियंत्रण उपकरण तो लगाए गए हैं, लेकिन उनका संचालन संतोषजनक नहीं पाया गया। कुछ जगहों पर लीकेज और बाईपास के संकेत मिले हैं।”
विभाग अब सभी सैंपल को लखनऊ की मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में भेजने की तैयारी कर रहा है ताकि सटीक रासायनिक विश्लेषण किया जा सके। उसके बाद ही अंतिम रिपोर्ट तैयार होगी।
रिमझिम स्टील के प्रबंधन ने अपनी सफाई में कहा है कि फैक्ट्री में सभी पर्यावरणीय मानकों का पालन किया जा रहा है। प्रबंधन का दावा है कि चिमनियों में आधुनिक फिल्टर लगे हैं और वेस्ट वाटर को ट्रीटमेंट प्लांट से गुजारे बिना बाहर नहीं छोड़ा जाता।
कंपनी प्रवक्ता ने बताया,
“हम पर्यावरण सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। जांच टीम को सभी रिकॉर्ड और दस्तावेज दिखाए गए हैं। यदि कहीं तकनीकी कमी पाई गई हो तो उसे तत्काल दुरुस्त किया जाएगा।”
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच रिपोर्ट में फैक्ट्री दोषी पाई जाती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डीएम कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि संभावित कार्रवाइयों में फैक्ट्री का अस्थायी संचालन स्थगन, जुर्माना, और पर्यावरण सुधार योजना लागू करने का आदेश शामिल हो सकता है।
डीएम ने कहा,
“जिला प्रशासन पर्यावरण संरक्षण को लेकर बेहद गंभीर है। किसी भी औद्योगिक इकाई को प्रदूषण फैलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।”
भारत में “पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986” और “जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1974” के तहत औद्योगिक इकाइयों पर कड़े मानक तय हैं। इसके बावजूद, कई फैक्ट्रियां मुनाफे की दौड़ में इन नियमों की अनदेखी करती हैं।
रिमझिम स्टील का मामला इस बात का उदाहरण है कि किस तरह उद्योग और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना आज भी चुनौती बना हुआ है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में केवल जांच या जुर्माना पर्याप्त नहीं होता।
लखनऊ विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. अजय त्रिपाठी का कहना है,
“जब तक उद्योगों के लिए पर्यावरणीय उल्लंघन आर्थिक रूप से महंगा नहीं बनाया जाएगा, तब तक वे नियमों की अवहेलना करते रहेंगे। जरूरत है कि सख्त निगरानी, पारदर्शी रिपोर्टिंग और जनभागीदारी बढ़ाई जाए।”
फैक्ट्री से बहता रासायनिक युक्त पानी नालों के जरिए पास के खेतों में जा रहा है। कृषि विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि इस तरह का अपशिष्ट जल मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को खत्म कर देता है और धीरे-धीरे जमीन को बंजर बना देता है।
स्थानीय किसानों ने शिकायत की है कि पिछले दो वर्षों में उनके खेतों की पैदावार में 20–25 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। वहीं, कुछ हैंडपंपों का पानी भी अब पीने लायक नहीं रहा।
इस पूरे मामले ने यह सवाल फिर से खड़ा कर दिया है कि औद्योगिक विकास और पर्यावरणीय सुरक्षा के बीच संतुलन कैसे कायम रखा जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासनिक जांच के साथ-साथ जनता को भी जागरूक होना होगा।
स्थानीय निवासियों को प्रदूषण से जुड़ी समस्याओं की रिपोर्टिंग के लिए “ग्रीन हेल्पलाइन” या मोबाइल ऐप जैसी व्यवस्था की जरूरत है, जिससे तुरंत कार्रवाई हो सके।
उन्नाव के अकरमपुर में रिमझिम स्टील पर लगे प्रदूषण के आरोपों ने एक बार फिर यह साबित किया है कि औद्योगिक विस्तार के साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
जांच रिपोर्ट आने के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन क्या कदम उठाता है और क्या वाकई ऐसी फैक्ट्रियां पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभा पाएंगी या नहीं।
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