लखीमपुर खीरी जनपद के निघासन ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम पंचायत बंगलहा तकिया के अयोध्या पुरवा गांव में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र के निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य में खुलेआम पीले ईंटों और घटिया निर्माण सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है, जिससे भवन की गुणवत्ता और मजबूती पर सवाल उठ रहे हैं।

गांव के निवासियों ने बताया कि यह कार्य सरकारी धन से कराया जा रहा है, लेकिन कार्य में पारदर्शिता और गुणवत्ता दोनों का अभाव है। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम प्रधान और संबंधित अधिकारी मिलकर सरकारी धन का दुरुपयोग कर रहे हैं। निर्माण स्थल पर न तो किसी इंजीनियर की नियमित निगरानी देखी गई, और न ही पंचायत सचिव या ब्लॉक स्तरीय अधिकारी ने मौके का निरीक्षण किया।
मामले को लेकर ग्रामीणों ने भ्रष्टाचार की शिकायत सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की, जो तेजी से वायरल हो रही है। वीडियो और तस्वीरों में स्पष्ट रूप से ईंटों की घटिया गुणवत्ता दिखाई दे रही है। इसके बावजूद जिले के आला अधिकारी और संबंधित विभाग ने अब तक कोई संज्ञान नहीं लिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद न तो निर्माण कार्य रोका गया और न ही किसी अधिकारी ने मौके पर आकर स्थिति का जायजा लिया। इससे नाराज ग्रामीणों ने जिलाधिकारी लखीमपुर खीरी (DM) से मामले की जांच कराने और जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
सूत्रों के मुताबिक, आंगनबाड़ी केंद्र के निर्माण कार्य में लाखों रुपये की लागत स्वीकृत की गई है, लेकिन निर्माण की वास्तविक स्थिति अत्यंत दयनीय है। ईंटों की गुणवत्ता मानक के अनुरूप नहीं है, सीमेंट-पानी का अनुपात भी बेहद खराब बताया जा रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे अधिकारी “कुंभकर्ण की नींद” में सोए हैं, जबकि भ्रष्ट ठेकेदार और ग्राम प्रधान खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
योगी सरकार जहां एक ओर पारदर्शी शासन और विकास की बात करती है, वहीं दूसरी ओर निचले स्तर पर जिम्मेदार अधिकारी इन योजनाओं में भ्रष्टाचार कर सरकार की मंशा पर पानी फेर रहे हैं। ग्रामीणों ने कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह भवन कुछ वर्षों में खंडहर बन जाएगा और आंगनबाड़ी केंद्र के उद्देश्य — बच्चों और महिलाओं के पोषण व शिक्षा — पर विपरीत असर पड़ेगा।
गांव के लोगों ने डीएम लखीमपुर खीरी से मांग की है कि
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निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए,
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संबंधित ग्राम प्रधान और निर्माण एजेंसी पर एफआईआर दर्ज की जाए,
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दोषी अधिकारियों को निलंबित किया जाए,
ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
अयोध्या पुरवा गांव का यह मामला सरकारी योजनाओं में व्याप्त जमीनी स्तर के भ्रष्टाचार का एक उदाहरण है। अगर इस पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो “बेटी-बचाओ, बेटी-पढ़ाओ” जैसी योजनाओं से जुड़े आंगनबाड़ी केंद्र सिर्फ नाम के लिए रह जाएंगे।
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