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नवजात को सिर के बल पटककर मारा… इसलिए कत्ल के लिए चुना रात का समय; अस्पताल के शौचालय में टब में मिली लाश

यूपी के जालौन के उरई में नवजात बच्ची की हत्या सिर के बल पटककर की गई थी। पोस्टमार्टम में इसकी आशंका जताई गई है। नवजात की मौत की वजह सिर में आई गंभीर चोट बताई गई है। यूपी के जालौन से कलेजा चीरने वाली खबर सामने आई है। जिला अस्पताल की इमरजेंसी के शौचालय में मानव भ्रूण नहीं, बल्कि नवजात बच्ची का शव मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में नवजात की मौत की वजह सिर में आई गंभीर चोट बताई गई है।

आशंका है कि नवजात बच्ची को सिर के बल पटककर मारा गया है। पुलिस जांच के बाद कार्रवाई करने की बात कह रही है। वहीं, सीएमएस ने जांच के लिए तीन डॉक्टरों की कमेटी बना दी है।

बता दें कि जिला अस्पताल में 14 अगस्त की रात करीब आठ बजे ड्यूटी बदलने के बाद पहुंचे दूसरी शिफ्ट के कर्मचारियों को इमरजेंसी के शौचालय में एक नवजात बच्ची का शव टब में मिला था।

आसपास खून के छींटे भी थे। उन्होंने फार्मासिस्ट और डॉक्टर को जानकारी दी। डॉक्टर ने सीएमएस डॉ. आनंद उपाध्याय को सूचना दी। रात करीब 10:30 बजे पुलिस को मेमो भेजा।

पुलिस ने शव को मोर्चरी में रखवाया
सीएमएस की सूचना पर करीब 11:30 बजे विधि विज्ञान प्रयोगशाला (फॉरेंसिक) की टीम पहुंचीं और जांच की। इसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया।

बच्ची की मौत सिर पर चोट लगने से हुई
रविवार को दोपहर में दो बजे शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि बच्ची की मौत सिर पर चोट लगने से हुई है। आशंका है कि बच्ची को पहले शौचालय में लाया गया फिर सिर के बल पटककर मार दिया गया। मौत हो जाने के बाद उसे टब में डाल दिया गया।

क्या किसी ने बाहर से आकर शव शौचालय में रख दिया?
इस मामले में अस्पताल स्टाफ संदेह के घेरे में है। यदि कोई महिला इमरजेंसी में आई थी तो प्रसव के समय वह चिल्लाई थी तो स्टाफ ने आवाज क्यों नहीं सुनी। क्या किसी ने बाहर से आकर शव शौचालय में रख दिया। जिला अस्पताल के बगल में महिला अस्पताल है तो महिला प्रसव के लिए वहां क्यों नहीं गई?

इधर, सीएमएस डॉ. आनंद उपाध्याय ने मामले की जांच के लिए वरिष्ठ चिकित्सकों की तीन सदस्यीय टीम गठित की है। टीम में रेडियोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ कुमार, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एसपी सिंह व डॉ. विनय अग्रवाल को शामिल किया है।

जानबूझकर तो नहीं चुना गया रात का समय
जिस वक्त वारदात हुई, उस वक्त रात के आठ बजे रहे थे। यह ड्यूटी बदलने का समय होता है। आशंका जताई जा रही है कि रात का समय जानबूझकर चुना गया। अपराध करने वालों को सीसीटीवी खराब होने की जानकारी थी। वह लोग सामने महिला अस्पताल में क्यों नहीं गए?

अस्पताल के खराब सीसीटीवी कैमरे से बढ़ गई समस्या
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, जिस शौचालय में नवजात बच्ची का शव मिला है, उसके बाहर भी सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। घटना के वक्त सीसीटीवी कैमरे बंद मिले। बताया गया है कि बिजली के ट्रिप होने से डीवीआर खराब हो गई थीं। इसकी वजह से रिकार्डिंग नहीं हो पाई है। सीसीटीवी कैमरे खराब होने की वजह से जांच में दिक्कत आ रही है।

इनसे होगी पूछताछ
14 अगस्त की दोपहर दो बजे से आठ बजे तक इमरजेंसी में डॉ. अनुपम मिश्रा और फार्मासिस्ट टीपी गौतम की ड्यूटी थी। रात आठ बजे से डॉ. अंबरीश कुमार और फार्मासिस्ट जेबी सिंह की ड्यूटी थी। इसके अलावा कंसलटेंट चिकित्सक के रूप में आर्थो सर्जन डॉ. मधुसूदन सिंह की भी ड्यूटी थी। हर पाली में दो स्टाफ नर्स, दो वार्डबॉय, दो स्वीपर की ड्यूटी के साथ अब सिक्योरिटी गार्ड की भी ड्यूटी थीं। सूत्रों की माने तो गठित टीम इनसे पूछताछ करेगी।

मामले को गंभीरता से लिया गया है। तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी गई है। स्वास्थ्य विभाग अपने स्तर से जांच कर रहा है। पुलिस विभाग अपने स्तर से जांच कर रहा है। जांच में जो तथ्य आएंगे, उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।- डॉ. आनंद उपाध्याय, सीएमएस, जिला अस्पताल

नवजात की मौत के मामले में हर बिंदु पर जांच की जा रही है। जांच के बाद आरोपियों पर कार्रवाई की जाएगी।- अर्चना सिंह, सीओ सिटी

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