January 22, 2017 1:56 AM
Breaking News

सपा का झगड़ा पहुंच सकता है न्यायपालिका के दर

हिन्द न्यूज़ डेस्क| मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने और शिवपाल सिंह यादव से प्रदेश अध्यक्ष छीने जाने की घटना पूरी तरह योजनाबद्ध है. राजनीतिक जानकार दावा कर रहे हैं कि मामले की पूरी जानकारी मुलायम सिंह यादव को है. उन्हें पार्टी के संविधान की भी पूरी समझ है.

आगे होगा यह कि शिवपाल ज्यादा से ज्यादा इस सम्मेलन के फैसलों के खिलाफ अदालत की शरण ले सकते हैं. लेकिन आखिरकार मुलायम सिंह राजनीति छोड़ने का कदम उठाते हुए अखिलेश और शिवपाल को एक साथ मिलकर पार्टी आगे बढ़ाने का फरमान भी सुना सकते हैं.

यह भी पढ़ें- अखिलेश, मुलायम टॉप, बाकी लोग हो गए फ्लॉप

हर निर्णय, चाहे वह पार्टी से निकालने का हो, या निलंबित करने का हो. ये सारे निर्णय लेने के लिए पार्टी में एक मशीनरी बनी हुई है. यहां तक कि सूची जारी करने का अधिकार भी सीधे अध्यक्ष का नहीं है. सूची पर जब तक पार्लियामेंट्री बोर्ड और पार्टी की एक्जीक्यूटिव बॉडी की सहमति न हो, तब तक तो सूची की कोई वैधता ही नहीं है. और इसके अलावा पार्टी के बाइलॉज जो कहते हैं, ये सब तो राम गोपाल यादव ने फ्रेम किए हैं.

उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के पूरे स्ट्रक्चर की जानकारी राम गोपाल यादव के पास है. ऐसा लगता है कि कहीं न कहीं मुलायम सिंह यादव को पता है कि उनके द्वारा लिए गए सभी निर्णय, निष्कासन और निलंबन वापस लेना, इन सभी चीजों को अदालत में सही नहीं ठहराया जा सकता. ये सभी निर्णय अदालत में स्टैंड नहीं करेंगे.

यह भी पढ़ें- सपा में फिर बढ़ी तकरार, मुलायम ने रामगोपाल को फिर पार्टी से निकाला

वहीं राम गोपाल ने जो राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाया है, वह उनके अधिकार क्षेत्र में आता है. वह राष्ट्रीय महासचिव होने के नाते यह निर्णय ले सकते हैं. ऐसी स्थिति में महासचिव द्वारा बुलाए गए सम्मेलन को अगर वैध माना जाए तो उसमें जो प्रस्ताव पास हुए हैं, उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारिणी को पास करने ही होंगे क्योकि माना जाएगा कि यह पार्टी का अाधिकारिक निर्णय है.

यह भी पढ़ें- ‘अम्मा’ का कद छू लिया मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने

वहीं मुलायम ने अभी तक इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है, वह शायद कुछ बोलेंगे भी नहीं. क्योंकि हमारा शुरू से मानना है कि यह सब उन्हीं की सहमति से हो रहा है. हां, शिवपाल के पास रास्ता ये है वह इस निर्णय को चुनौती दें, चाहे वह इलेक्शन कमीशन में चुनौती दें. इलेक्शन कमीशन में चुनौती देने की नौबत आने की संभावना कम है, हां, वह कोर्ट में चुनौती जरूर दे सकते हैं कि जो सम्मेलन था वह अवैध था. उस सम्मेलन में लिए गए निर्णय भी अवैध हैं. अभी भी मैं ही पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष हूं.

अब इसमें बॉल शिवपाल के कोर्ट में है. हमने तो मुलायम को अध्यक्ष बना दिया, शिवपाल अमर सिंह को निकाल दिया, अब शिवपाल क्या करेंगे. तो शिवपाल के सामने इस निर्णय को चुनौती देने के लिए या तो वह कोर्ट जाएं या वह अपनी तरफ से सम्मेलन बुलाकर अखिलेश को निकाल दें. लेकिन सवाल यह है कि क्या शिवपाल के अंदर ये कैपेसिटी है.

यह भी पढ़ें- साल 2016 का सच दुनियाभर में मारे गए 122 पत्रकार

आगे क्या होगा के सवाल पर रतन मणि लाल कहते हैं कि उन्हें ऐसा लगता है कि एक दो दिन में या आज ही मुलायम सिंह कुछ ऐसी परिस्थिति बना देंगे कि वह यह घोषणा कर दें कि मैं यह मानता हूं कि मेरी जो अवस्था है या जो भी वह शब्द कहें कि अब मुझसे नहीं झेला जा रहा है, ​अखिलेश जैसा चाहें, वैसा करें. शिवपाल और अखिलेश हम चाहते हैं कि तुम दोनों मिलकर पार्टी को आगे बढ़ाओ. ऐसा कुछ बोलेंगे वह. क्योंकि मुलायम के लिए शिवपाल को भी किनारे करना संभव नहीं है.