May 23, 2017 12:39 PM
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पिता मुलायम के दुलारे अखिलेश यादव कलियुग के असली श्रवण कुमार

हिन्द न्यूज़ डेस्क(शिवेंद्र सिंह बघेल)| यूपी में अगले साल होने वाले सियासी संग्राम से पहले घर में जमकर विवाद हो रहा है. इस संग्राम में जीत किसकी होगी, यह कह पाना बहुत मुश्किल होगा. लेकिन इन तमाम बातों को अगर हम छोड़ दे तो अखिलेश पिता मुलायम सिंह के लिए श्रवण कुमार जैसे ही रहें हैं.

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अखिलेश यादव के जीवन के इतिहास के पन्नों को अगर आप पलटकर देखेगें तो आपको पता चलेगा कि बेटे ने आज तक अपने पिता को कभी भी जवाब नहीं दिया और ना ही कभी सम्मान में कमी आने दी. आज भी अखिलेश की जुबान से पिता मुलायम सिंह के लिए केवल ‘नेताजी’ जैसा ही शब्द निकालता है.

आइए हम आपको लिए चलते हैं इतिहास के उन पन्नों में जब-जब अखिलेश ने साबित किया कि असल में वह श्रवण कुमार हैं

पिता मुलायम के एक फोन पर अखिलेश ने कैंसिल किया था हनीमून

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बाप मुलायम की उंगली पकड़कर राजनीति का ककहरा पढ़ने वाले अखिलेश ने तो शादी होने के बाद भी उनकी बातों का मान रखा था और अपने पिता के एक फोन कॉल पर अपने हनीमून तक को कैसिंल कर दिया था.

24 नवंबर 1999 को डिंपल संग अखिलेश ने लिए थे सात फेरे

इस बारे में खुलासा खुद उनकी पत्नी और कन्नौज से सांसद डिंपल यादव ने एक इंटरव्यू में किया था. डिंपल ने कुछ वक्त पहले एक पत्रिका को अपना इंटरव्यू दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि 24 नवंबर 1999 को उनकी और अखिलेश की शादी हुई थी. क्रिसमस के बाद हम दोनों हनीमून मनाने सिडनी जाने वाले थे और इसलिए देहरादून में शॉपिंग कर रहे थे.

अखिलेश पहले राजनीति में आना नहीं चाहते थे

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इसी दौरान अखिलेश को नेताजी यानी मुलायम का फोन आया कि वो तत्काल प्रभाव से लखनऊ चले आए और उपचुनाव की तैयारी करें क्योंकि उन्हें कन्नौज से चुनाव लड़ना है. हालांकि अखिलेश पहले राजनीति में आना नहीं चाहते थे लेकिन डिंपल के समझाने के बाद उन्होंने पिता की बातों का सम्मान किया और अपना हनीमून कैंसिल करके वापस लखनऊ आ गए और चुनाव की तैयारियों में जुट गए.

साल 2000 में कन्नौज से सांसद बने

अखिलेश की मेहनत रंग लाई और वो साल 2000 में कन्नौज से जीत गए. राजनीति में कदम रखने के बाद अखिलेश और डिंपल कभी भी हनीमून पर नहीं गए. अपनी पत्नी का साथ निभाते हुए अखिलेश अपने पिता संग कदम से कदम मिलाकर चलते रहे और पिता के ही कहने पर उन्हें साल 2012 में यूपी का सिंहासन हासिल हुआ था.

कभी मुलायम को पलट कर जवाब नहीं दिया 

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पब्लिक मीटिंग हो या सार्वजनिक मंच, मुलायम ने कभी भी अखिलेश को डांटा तो उन्होंने सिर झुकाकर केवल सुना, कभी पलट कर जवाब नहीं दिया तो फिर ऐसा क्या हुआ कि आज दोनों बाप-बेटे एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हो गए है, इस सवाल का जवाब आज हर कोई खोज रहा है.

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