August 23, 2017 11:44 AM
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भारत में हैं हजारों साल पुराने मंदिर, लोगों की जुड़ी है इनसे आस्थाएं

हिन्द न्यूज़ डेस्क : भारत एक विशाल देश है साथ ही यहां के लोगों में भगवान के प्रति एक  आस्था विश्वास जुड़ी हुई है . यही नहीं यहां हजारों साल पुराने मंदिर भी है जो किसी और देश में नहीं हैं. यहां जीतने मंदिर हैं उतनी ही उनसे जुड़ी आस्थाएं भी हैं. ऐसे ही हम आपको कई साल पुराने मंदिरो में ले चलेंगे जहां आप अपनी मनोकामना पूरी कर सकेंगे.

शोर मंदिर, महाबलीपुरम, तमिलनाडु

इस मंदिर का निर्माण नरसिंहवर्मन द्वितीय के काल में ग्रेनाइट से करवाया गया था. इसे बंगाल की खाड़ी के शोर के रूप में जाना जाता है.यह संरचनात्मक मंदिरों की सूची में सबसे पुराना उदाहरण है.ये मंदिर यूनेस्को की विश्व विरासत स्थल सूची के अंतर्गत शामिल किया गया है. यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है.

सोमनाथ मंदिर, गुजरात

सोमनाथ मंदिर की गिनती 12 ज्योर्तिलिंगों में होती है. गुजरात सौराष्ट्र के वेरावल में स्थित इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण स्वयं चन्द्रदेव ने किया था. इसका उल्लेख ऋग्वेद में भी मिलता है.इसे अब तक 17 बार नष्ट किया गया है और हर बार इसका पुननिर्माण किया गया.

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अंबरनाथ मंदिर, महाराष्ट्र

महाराष्ट्र का अंबरनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित है.मंदिर में मिले एक शिलालेख के अनुसार इसका निर्माण 1060 ईस्वी में शिलाहट के राजा मांबणि ने करवाया था.वहां के स्थानीय निवासी इस मंदिर को पांडवकालीन मानते हैं.

बृहदेश्वर मंदिर, तमिलनाडु

तमिलनाडु का बृहदेश्वर शिव मंदिर चोल वास्तुकला का शानदार उदाहरण है. इसे चोल शासक राज राज प्रथम ने बनवाया था। इसलिए इसे राजराजेश्वर नाम दिया गया.

कैलाश मंदिर, महाराष्ट्र

कैलाश मंदिर महाराष्ट्र के उन प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है, जो एलोरा की गुफाओं में स्थित है. भगवान शिव का यह दो मंजिला मंदिर पर्वत की ठोस चट्टान को काटकर बनाया गया है. यह मंदिर दुनिया भर में एक ही पत्थर की शिला से बनी हुई सबसे बड़ी मूर्ति के लिए प्रसिद्ध है. इस मंदिर को तैयार करने में करीब 150 वर्ष लगे और लगभग 7000 मजदूरों ने लगातार इस पर काम किया.

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लिंगराज मंदिर, भुवनेश्वर, ओडिशा

यह भुवनेश्वर शहर के प्राचीनतम मंदिरों में से एक है. भगवान त्रिभुवनेश्वर को समर्पित है। इस मंदिर का वर्तमान स्वरूप 1090-1104 में बना, लेकिन इसके कुछ हिस्से 1400 वर्ष से भी ज्यादा पुराने हैं. इस मंदिर का उल्लेख छठी शताब्दी के लेखों में भी आता है.

केदारनाथ मंदिर, उत्तराखंड

इस मंदिर की उम्र के बारे में कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है, पर एक हजार वर्षों से केदारनाथ एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थान रहा है.राहुल सांकृत्यायन के अनुसार यह 12-13 वीं शताब्दी का है. ग्वालियर से मिली राजा भोज स्तुति के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण राजा भोज ने कराया था. एक मान्यतानुसार वर्तमान मंदिर 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य द्वारा बनवाया गया जो पांडवों द्वारा द्वापर काल में बनाए गए मंदिर से समीप है. मंदिर के बड़े धूसर रंग की सीढ़ियों पर पाली भाषा (ब्राह्मी लिपि) में कुछ खुदा है, जिसे स्पष्ट समझना मुश्किल है.

बद्रीनाथ मंदिर, उत्तराखंड

उत्तराखंड के पहाड़ों में स्थित बद्रीनाथ के बारे में ऐतिहासिक मान्यता है कि यह एक बौद्ध स्तूप था. आद्य शंकराचार्य ने 8वीं शताब्दी में इसे हिंदू मंदिर के रूप में स्थापित किया. ये मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है.

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श्री रंगनाथ स्वामी मंदिर को क्षेत्रफल के हिसाब से भारत का सबसे बड़ा मंदिर कहा जाता है. इसका क्षेत्रफल 631,000 वर्ग मीटर में फैला है. यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है.यह मंदिर द्रविड़ शैली में बना हुआ है. इस मंदिर को प्राचीन काल से ही प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बना हुआ है.इस मंदिर पर डच, पुर्तगाली और अंग्रेजों ने कई बार आक्रमण किया.

द्वारिकाधीश मंदिर, गुजरात

मान्यता है कि यह मंदिर भगवान श्रीकृष्ण के प्रपोत्र वज्रनाभ ने बनवाया था। कालांतर में इस मंदिर का जीर्णोद्धार होता रहा.मंदिर का वर्तमान स्वरूप 16वीं शताब्दी में बनाया .गया.इसे आद्यशंकराचार्य जी ने चार धामों में से एक के रूप में स्थापित किया है.

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