September 25, 2017 1:23 PM
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कुप्रथा: सेक्स इच्छा दबाने के लिए बचपन में ही लड़कियों का काट देते हैं प्राइवेट पार्ट, देखें तस्वीरें

हिन्द न्यूज़ डेस्क| किसी लड़की जो 9-10 की हो और थोड़ी समझदार भी हो गयी हो, क्या उसका प्राइवेट पार्ट काटना सही है. बिना उसे कुछ बताये सिर्फ टॉफी का बहाना बना कर बच्चियों को बहला-फुसला कर एक अँधेरे कमरे में ले जा कर काट देते हैं प्राइवेट पार्ट.

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तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब मुस्लिम महिलाएं खतने को लेकर भी आवाज उठा रही हैं. बोहरा मुस्लिम समुदाय की मासूमा रानाल्वी ने पीएम के नाम एक खुला ख़त लिखकर इस कुप्रथा को रोकने की मांग की है.

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मासूमा लिखती हैं-  बोहरा समुदाय में सालों से ‘ख़तना’ या ‘ख़फ्ज़’ प्रथा का पालन किया जा रहा है. बोहरा, शिया मुस्लिम हैं. मेरे समुदाय में आज भी छोटी बच्चियों के साथ क्या होता है. जैसे ही कोई बच्ची 7 साल की हो जाती है, उसकी मां या दादीमां उसे एक दाई या लोकल डॉक्टर के पास ले जाती हैं.

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बच्ची को ये नहीं बताया जाता कि उसे कहां ले जाया जा रहा है या उसके साथ क्या होने वाला है. दाई या आया या वो डॉक्टर उसके प्राइवेट अंग को काट देते हैं. इस प्रथा का दर्द ताउम्र के लिए उस बच्ची के साथ रह जाता है. इस प्रथा का एकमात्र उद्देश्य है, बच्ची या महिला के यौन इच्छाओं को दबाना.

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भारत में इसे मानने वाले दाऊदी बोहरा मजबूत व्यापारी मुस्लिम समुदाय है. करीब 10 लाख लोग मुंबई और आसपास के इलाकों में रहते हैं. दक्षिणी मुंबई के मालाबार हिल इलाके में इनका मुख्यालय हैं. यहां भारत के कुछ सबसे अमीर लोग रहते हैं. यहीं सैयदना बैठते हैं, बोहरा धर्मगुरु.

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गौरतलब है कि इस खतने की वजह से बहुत ज्यादा खून बहता है और दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं. इनमें सिस्ट बनना, संक्रमण, बांझपन तो आम हैं ही, बच्चे के जन्म के समय जटिलताएं बढ़ जाती हैं और इसमें नवजात की मृत्यु का जोखिम बढ़ना भी शामिल है.

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2015 में बोहरा समुदाय की कुछ महिलाओं ने एकजुट होकर ‘WeSpeakOut On FGM’ नाम से एक कैंपेन शुरू किया और यहां हमने आपस में अपनी दुख और कहानियां एक-दूसरे से कही. हमने Change.org पर एक कैंपन की शुरुआत की थी.इसे बंद करने के समर्थन में हमें 9 हजार से ज़्यादा साइन मिल गए हैं.

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