May 25, 2017 3:13 AM
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अगर आपको दिखना है लोहे की तरह स्ट्रॉंग तो ले जाइए पालक

हिन्द न्यूज़ डेस्क : यूं तो पालक के कई फायदे होते हैं. यही नहीं पालक खाने से आपको कोई नुकसान नहीं होता है. लेकिन फिर भी आप जिस चीज का सेवन कर रहे हैं उसके बारे में आपको पता होना जरूरी होता है. पालक में कई सारे ऐसे गुण होते हैं जिन्हे हम नहीं जानते हैं. यही नहीं यह बाज़ारों में भी आसानी से और सस्ते में मिल जाती है. इसलिए आज हम इसके गुणों सहित फ़ायदों के बारे में भी बात करेंगे. तो जानते हैं इसके फायदे-

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1 इसमें पाए जाने वाले तत्वों में मुख्य रूप से कैल्शियम, सोडियम, क्लोरीन, फास्फोरस, लोहा, खनिज लवण, प्रोटीन, श्वेतसार, विटामिन ‘ए’ एवं ‘सी’ आदि उल्लेखनीय हैं. इन तत्वों में भी लोहा विशेष रूप से पाया जाता है.

2 लौह तत्व मानव शरीर के लिए उपयोगी, महत्वपूर्ण, अनिवार्य होता है. लोहे के कारण ही शरीर के रक्त में स्थित रक्ताणुओं में रोग निरोधक क्षमता तथा रक्त में रक्तिमा (लालपन) आती है. लोहे की कमी के कारण ही रक्त में रक्ताणुओं की कमी होकर प्रायः पाण्डु रोग उत्पन्न हो जाता है.

3 लौह तत्व की कमी से जो रक्ताल्पता अथवा रक्त में स्थित रक्तकणों की न्यूनता होती है, उसका तात्कालिक प्रभाव मुख पर विशेषतः होंठ, नाक, गाल, कान एवं आंखों पर पड़ता है, जिससे चेहरे की रंगत अैर लालिमा चली जाती है. कालांतर में संपूर्ण शरीर भी इस विकृति से प्रभावित हुए बिना नहीं रहता.

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4 लोहे की कमी से शक्ति ह्रास, शरीर निस्तेज होना, उत्साहहीनता, स्फूर्ति का अभाव, आलस्य, दुर्बलता, जठराग्नि की मंदता, अरुचि, यकृत आदि परेशानियां होती हैं.

पालक की शाक वायुकारक, शीतल, कफ बढ़ाने वाली, मल का भेदन करने वाली, गुरु (भारी) विष्टम्भी (मलावरोध करने वाली) मद, श्वास,पित्त, रक्त विकार एवं ज्वर को दूर करने वाली होती है.

6 आयुर्वेद के अनुसार पालक की भाजी सामान्यतः रुचिकर और शीघ्र पचने वाली होती है. इसके बीज मृदु, विरेचक एवं शीतल होते हैं. ये कठिनाई से आने वाली श्वास, यकृत की सूजन और पाण्डु रोग की निवृत्ति हेतु उपयोग उपयोग में लाए जाते हैं.

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7 गर्मी का नजला, सीने और फेफड़े की जलन में भी यह लाभप्रद है. यह पित्त की तेजी को शांत करती है, गर्मी की वजह से होने वाले पीलिया और खांंसी में यह बहुत लाभदायक है.

8 स्त्रियों के लिए पालक का शाक अत्यंत उपयोगी है. युवतियां यदि अपने चेहरे का नैसर्गिक सौंदर्य एवं रक्तिमा (लालिमा) बढ़ाना चाहती हैं, तो उन्हें नियमित रूप से पालक के रस का सेवन करना चाहिए. प्रयोग से देखा गया है कि पालक के निरंतर सेवन से रंग में निखार आता है. इसे भाजी (सब्जी) बनाकर खाने की अपेक्षा यदि कच्चा ही खाया जाए, तो अधिक लाभप्रद एवं गुणकारी है. पालक से रक्त शुद्धि एवं शक्ति का संचार होता है.

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